अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बहुत बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार सुबह से ईरान के समुद्री रास्तों की नाकाबंदी करने का फैसला किया है। वहीं इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता भी नाकाम रही, जिससे युद्ध रुकने की उम्मीदें कम हो गई हैं। इसराइल में भी आम जनता युद्धविराम के खिलाफ नजर आ रही है।

ट्रंप का बड़ा फैसला और ईरान की चेतावनी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि सोमवार सुबह 10 बजे से Strait of Hormuz की naval blockade शुरू होगी। US Central Command ने बताया कि यह नाकाबंदी केवल ईरानी बंदरगाहों पर आने और जाने वाले जहाजों के लिए लागू होगी। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर कोई सैन्य जहाज उनके इलाके के पास आया तो उसे सख्ती से जवाब दिया जाएगा। ईरान के नौसेना प्रमुख ने ट्रंप की इस धमकी को बेकार बताया है।

इसराइल में क्या है माहौल और लेबनान का हाल

Hebrew University of Jerusalem के एक सर्वे में पाया गया है कि लगभग दो-तिहाई इसराइली लोग युद्धविराम का विरोध कर रहे हैं। इस सर्वे की खास बातें नीचे दी गई हैं:

  • 41 प्रतिशत लोग दो हफ्ते के विराम का सम्मान करने के पक्ष में हैं।
  • 39 प्रतिशत लोगों का मानना है कि ईरान पर हमले फिर से शुरू होने चाहिए।
  • 19 प्रतिशत लोग इस मामले में अनिश्चित हैं।
  • 61 प्रतिशत से ज्यादा लोगों का मानना है कि यह समझौता लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ चल रही लड़ाई पर लागू नहीं होना चाहिए।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिण लेबनान में सैनिकों से मुलाकात की और साफ कहा कि लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में युद्ध अभी जारी है।

इस्लामाबाद वार्ता क्यों रही नाकाम

पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई बातचीत से कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि वार्ता इसलिए विफल रही क्योंकि ईरान यूरेनियम संवर्धन और परमाणु सुविधाओं को खत्म करने की शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था। इसी बीच पोप लियो XIV ने शांति की अपील की है और कहा है कि उनकी बातें शांति के संदेश पर आधारित हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.