अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म करने के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है। इस डील के तहत ईरान को उसकी अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए 300 अरब डॉलर का फंड मिल सकता है। हालांकि, यह पैसा ईरान को तभी मिलेगा जब वह अमेरिका की शर्तें मानेगा और अपना व्यवहार सुधारेगा।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने एक इंटरव्यू में बताया कि ईरान को इस फंड का फायदा तब होगा जब वह अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर देगा। साथ ही ईरान को अपने पास मौजूद परमाणु सामग्री को हटाना होगा और कड़ी जांच प्रक्रियाओं को स्वीकार करना होगा।
वहीं राष्ट्रपति Donald Trump ने इस बात को साफ़ कर दिया है कि अमेरिकी सरकार इस फंड में एक पैसा भी नहीं लगाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से कोई पैसा नहीं दिया जाएगा, बल्कि खाड़ी देशों (Gulf states) और दुनिया भर की प्राइवेट कंपनियां इसमें निवेश करेंगी। ट्रंप ने कहा कि निवेश का फैसला पूरी तरह ईरान के बर्ताव पर निर्भर करेगा।
इस पूरे मामले की मुख्य जानकारियां नीचे दी गई टेबल में देखी जा सकती हैं:
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कुल फंड की राशि | 300 अरब डॉलर |
| फंड का स्रोत | Gulf देश और प्राइवेट कंपनियां |
| US सरकार का योगदान | शून्य (0) |
| मुख्य शर्तें | परमाणु कार्यक्रम बंद करना और जांच स्वीकार करना |
| समझौता तिथि (MoU) | 17 जून और 19 जून 2026 |
| साइनिंग लोकेशन | स्विट्जरलैंड |
17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता (MoU) इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन किया गया था, जिसे 19 जून को स्विट्जरलैंड में औपचारिक रूप से साइन किया गया। राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने आपसी संघर्ष को खत्म करने पर सहमति जताई है।
इस समझौते के तहत कुछ और अहम फैसले भी लिए गए हैं:
- दोनों देशों के बीच सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने का फैसला हुआ है।
- ईरान पर लगे प्रतिबंधों (Sanctions) में ढील देने का ढांचा तैयार किया जाएगा।
- Strait of Hormuz को फिर से खोलने की बात कही गई है।
- ईरान के आर्थिक विकास के लिए 60 दिनों के भीतर एक विस्तृत योजना बनाई जाएगी।