अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के साथ चल रही बातचीत को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि तेहरान के साथ कोई भी समझौता तभी होगा जब वह पूरी तरह से सार्थक और मजबूत होगा, अन्यथा कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मई 2026 में चल रही इस कूटनीतिक बातचीत के बीच दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय संघर्ष को रोकने और व्यापारिक मार्गों को खोलने के लिए एक 60 दिनों के समझौते पर सहमति जताई है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।
ट्रंप ने बातचीत को लेकर क्या कहा और उनकी क्या शर्तें हैं?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान के साथ बातचीत अच्छे तरीके से आगे बढ़ रही है। हालांकि, उन्होंने अमेरिकी वार्ताकारों को निर्देश दिया है कि वे समझौते के लिए किसी भी तरह की जल्दबाजी न करें क्योंकि समय अमेरिका के पक्ष में है। ट्रंप ने साफ किया कि नया समझौता साल 2015 के JCPOA समझौते से बिल्कुल अलग होगा, जिसकी वे पहले भी आलोचना कर चुके हैं। इसके अलावा, ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक एक पूर्ण और प्रमाणित समझौता नहीं हो जाता, तब तक Strait of Hormuz पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह से लागू रहेगी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और परमाणु मुद्दे पर क्या सहमति बनी?
इस समझौते के तहत प्रारंभिक स्तर पर एक 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (MOU) तैयार किया गया है। इसके प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz): ईरान 30 दिनों के भीतर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को व्यापारिक जहाजों के लिए खोलने पर सहमत हुआ है, जिसके बदले में अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा।
- परमाणु ईंधन का निपटारा: ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को नष्ट करने या इसे रूस जैसे किसी तीसरे देश में भेजने पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुआ है।
- प्रतिबंधों में राहत: ईरान ने मांग की है कि शुरुआती समझौते के साथ ही उस पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाए और उसकी रुकी हुई संपत्तियों को बहाल किया जाए, जबकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह सब ईरान द्वारा अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने के बाद ही होगा।
इस समझौते पर अन्य देशों और सहयोगियों की क्या भूमिका है?
इस बातचीत में मध्यस्थ के रूप में Pakistan अपनी भूमिका निभा रहा है, जबकि Qatar में ईरान के मुख्य वार्ताकार के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस बातचीत को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है और कहा है कि कूटनीतिक रास्ते खुले हुए हैं। दूसरी ओर, इसराइल के विपक्षी नेता Yair Lapid ने इस समझौते का विरोध करते हुए इसे इसराइल और क्षेत्र के लिए एक बुरा समझौता बताया है। ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई, तुर्की और मिस्र जैसे क्षेत्रीय देशों के नेताओं से भी इस संबंध में बात की है और उन्हें अब्राहम समझौते में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका और ईरान के बीच इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व में क्षेत्रीय संघर्ष को रोकना, व्यापार के लिए Strait of Hormuz को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण स्थापित करना है।
क्या इस समझौते से ईरान पर लगे प्रतिबंध तुरंत हट जाएंगे?
ईरान ने प्रतिबंध हटाने और अपनी जमी हुई संपत्ति को बहाल करने की मांग की है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि प्रतिबंध तभी हटाए जाएंगे जब ईरान अपनी सभी परमाणु प्रतिबद्धताओं को पूरा करेगा।