अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने के लिए एक समझौता हुआ है, लेकिन अब इसे लागू करने में दिक्कतें आ रही हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों देशों के बीच भरोसे की बहुत कमी है, जिसके कारण इस डील का ठीक से पालन होना मुश्किल हो सकता है।
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौता पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके बाद अब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 60 दिनों की बातचीत का दौर शुरू हुआ है। इसी सिलसिले में JD Vance ने स्विट्जरलैंड की अपनी यात्रा को भी आगे बढ़ा दिया है ताकि वे ईरान के साथ नए दौर की बातचीत की अगुवाई कर सकें।
किंग्स कॉलेज लंदन के विजिटिंग लेक्चरर Samir Puri ने इस स्थिति पर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि जब दो देशों के बीच युद्ध होता है, तो भरोसे की भारी कमी हो जाती है। उन्होंने ज़ोर दिया कि अगर किसी तीसरी निष्पक्ष टीम द्वारा निगरानी नहीं की गई, तो दोनों देशों को एक-दूसरे पर भरोसा करना मुश्किल होगा और वे अपनी आक्रामक सैन्य स्थिति को कम नहीं करेंगे।
हाल के दिनों में तनाव और बढ़ गया है क्योंकि करीब 10 दिन पहले अमेरिका का एक Apache helicopter gunship गिराया गया था। इस वजह से दोनों तरफ की सेनाएं अभी भी हाई अलर्ट पर हैं और मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार बैठी हैं।
समझौते से जुड़ी मुख्य बातें
- अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए MoU साइन हुआ है।
- दोनों देशों के बीच 60 दिनों की बातचीत का समय तय किया गया है।
- स्विट्जरलैंड में होने वाली बातचीत को फिलहाल टाल दिया गया है।
- स्वतंत्र निगरानी की कमी से समझौते के लागू होने में बाधा आ सकती है।