अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े समझौते को लेकर बातचीत तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भरोसा दिया है कि किसी भी समझौते से ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने दिया जाएगा। वहीं इसराइल ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह आजाद रहेगा। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर इसराइल के अंदर ही विरोध के सुर उठने लगे हैं और इस सौदे को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

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इसराइल और अमेरिका के बीच क्या बातचीत हुई है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बात की है। ट्रंप ने भरोसा दिलाया है कि ईरान के साथ होने वाले किसी भी समझौते के तहत तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म किया जाएगा और वहां से सारा संवर्धित यूरेनियम बाहर निकाला जाएगा। ट्रंप ने कहा है कि जब तक समझौता फाइनल और प्रमाणित नहीं हो जाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी जारी रहेगी। उन्होंने अपने अधिकारियों को बातचीत में जल्दबाजी न करने की हिदायत दी है। दूसरी तरफ नेतन्याहू ने साफ किया है कि इसराइल लेबनान सहित सभी मोर्चों पर खतरों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की अपनी आजादी बरकरार रखेगा। नेतन्याहू सैन्य कार्रवाई के पक्ष में थे जबकि ट्रंप कूटनीतिक रास्ते को समय देना चाहते हैं।

ईरान और अमेरिका के बीच इस समझौते में क्या शर्तें शामिल हैं?

इस समझौते से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आ रही हैं जो इस प्रकार हैं:

  • 60 दिनों का सीजफायर: समझौते में शुरुआती तौर पर 60 दिनों के सीजफायर और होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने पर ध्यान दिया जा रहा है।
  • प्रतिबंधों में ढील: अमेरिका ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंध हटा सकता है, जिससे ईरान तेल का व्यापार कर सकेगा और विदेशों में फंसे अपने 25 अरब डॉलर वापस पा सकेगा।
  • ईरान का रुख: ईरान के सूत्रों का कहना है कि वे अपना संवर्धित यूरेनियम बाहर भेजने को तैयार नहीं हैं। ईरान का विदेश मंत्रालय केवल युद्ध को समाप्त कराने पर ध्यान दे रहा है और परमाणु मुद्दे पर बात करने से बच रहा है।
  • हमला न करने का वादा: ईरानी मीडिया के अनुसार, समझौते के मसौदे में यह भी शामिल है कि अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान पर हमला नहीं करेंगे और बदले में ईरान भी पहले हमला नहीं करेगा।

इसराइल में इस समझौते का विरोध क्यों हो रहा है?

इसराइल के प्रमुख नेता बेनी गैंट्ज़ ने चेतावनी दी है कि ईरान डील के तहत लेबनान में सीजफायर स्वीकार करना इसराइल के लिए एक बड़ी रणनीतिक भूल होगी। इसके अलावा, न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इसराइल को इस बातचीत से लगभग पूरी तरह बाहर रखा गया है, जिससे इसराइली सरकार अन्य माध्यमों से जानकारी जुटाने को मजबूर है। इसराइल की सुरक्षा कैबिनेट के एक सदस्य ने इस समझौते की शर्तों को बेहद खराब बताया है क्योंकि इसमें परमाणु मुद्दे से ज्यादा ध्यान सीजफायर और समुद्री रास्ते को खोलने पर दिया गया है। विश्लेषक अकिवा एल्डर ने अल जज़ीरा से बातचीत में कहा कि नेतन्याहू के वादों और जमीनी हकीकत के बीच एक बहुत बड़ी खाई है जिसे पाटना आसान नहीं है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद करने के लिए तैयार है?

ईरानी सूत्रों के अनुसार, तेहरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक को सौंपने के लिए तैयार नहीं है। ईरान का मुख्य ध्यान अभी केवल युद्ध को समाप्त करने और प्रतिबंधों को हटाने पर केंद्रित है।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर क्या योजना बनाई गई है?

समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी टोल टैक्स के पूरी तरह खोलने की योजना है। हालांकि, अंतिम समझौता होने तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी और ईरान का कहना है कि यह क्षेत्र उसके नियंत्रण में रहेगा।