अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौता हुआ है जिसे लेकर दुनिया भर में चर्चा है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस डील का खुलकर समर्थन किया है, जबकि इसराइल और अमेरिका के कुछ अधिकारी इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं। इस समझौते का मुख्य मकसद युद्ध को रोकना और व्यापारिक रास्तों को फिर से चालू करना है।
समझौते की मुख्य बातें और शर्तें
अमेरिका और ईरान ने एक समझौता (MoU) इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन किया है। इस पर 21 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में आमने-सामने बैठकर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। बातचीत का 60 दिनों का समय 18 जून 2026 से शुरू हो गया है। उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ तौर पर कहा है कि ईरान को इस डील का फायदा तभी मिलेगा जब वह पूरी तरह नियमों का पालन करेगा और अपने व्यवहार में बदलाव लाएगा।
इस डील के तहत कुछ बड़े फैसले लिए गए हैं:
- समुद्री रास्ता: US Central Command (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा ली है। अब ईरान के अधिकारी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को परमिट जारी करेंगे।
- शिपिंग फीस: जहाजों को पहले 60 दिनों तक मुफ्त रास्ता मिलेगा। हालांकि, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र ग़ालिबफ़ ने कहा है कि 60 दिन बाद ईरान अपनी संप्रभुता के आधार पर जहाजों से शुल्क लेगा।
- सैन्य कार्रवाई: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से बंद करने का फैसला हुआ है।
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने परमाणु कार्यक्रम के भंडार और क्षमताओं पर अमेरिका के साथ तकनीकी बातचीत करेगा।
आर्थिक राहत और प्रतिबंध
अमेरिका का ट्रेजरी विभाग ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए विशेष छूट जारी करेगा। अंतिम समझौते के बाद प्रतिबंधों को पूरी तरह खत्म किए जाने की उम्मीद है। उपराष्ट्रपति वेंस ने भरोसा जताया है कि प्रशासन बिना कांग्रेस की मंजूरी के भी ईरान पर से प्रतिबंध अस्थायी रूप से हटा सकता है।
इसराइल का विरोध और ट्रंप की प्रतिक्रिया
इस डील पर इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी कैबिनेट ने कड़ी नाराजगी जताई है। जेडी वेंस ने व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में इसराइल के आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ही दुनिया में इसराइल के एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी हैं। वेंस ने यह भी कहा कि केवल हमलों से सुरक्षा नहीं मिलती और बेरूत में नागरिकों को नुकसान पहुंचाना स्वीकार नहीं है।
दूसरी तरफ, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते में कमियां निकालने वालों को मूर्ख और जलनखोर बताया है। ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामनेई ने शुरुआत में इस डील से असहमति जताई थी, लेकिन बाद में अपने हितों की सुरक्षा का आश्वासन मिलने पर इसे मंजूरी दे दी।