अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों को सुधारने के लिए एक बड़ी डील की तैयारी चल रही है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक ‘ग्रैंड बार्गेन’ करना चाहते हैं। अगर ईरान परमाणु हथियार न बनाने का वादा करता है, तो अमेरिका उसे एक सामान्य देश की तरह तरक्की करने में मदद करेगा।

अमेरिका और ईरान के बीच क्या है यह ‘ग्रैंड बार्गेन’?

उपराष्ट्रपति JD Vance ने मंगलवार शाम को बताया कि अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साफ करे। अगर ईरान इस बात पर सहमत होता है, तो अमेरिका उसके साथ आर्थिक रिश्तों को फिर से सामान्य कर देगा। इससे ईरान को आर्थिक रूप से आगे बढ़ने और समृद्ध होने का मौका मिलेगा। हालांकि, दोनों देशों के बीच पुराना अविश्वास अभी भी बना हुआ है जिसे दूर होने में समय लगेगा।

बातचीत में क्या रही दिक्कतें और कौन लोग शामिल थे?

पाकिस्तान में हुई बातचीत के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच कुछ मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई। अमेरिका ने परमाणु गतिविधियों को 20 साल तक रोकने का प्रस्ताव दिया था, जबकि ईरान ने केवल 5 साल का समय मांगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि वह चाहते हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न रखे। इस बातचीत में दोनों तरफ से कई बड़े अधिकारी शामिल थे:

नाम भूमिका/देश
डोनाल्ड ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति
JD Vance अमेरिकी उपराष्ट्रपति
स्टीव विटकॉफ मध्य पूर्व के विशेष दूत
जेरेड कुशनर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल सदस्य
मार्को रूबियो अमेरिकी विदेश मंत्री
स्कॉट बेसेंट अमेरिकी ट्रेजरी सचिव
एडम ब्रैड कूपर US सेंट्रल कमांड प्रमुख
मोहम्मद बागेर कालिबाफ ईरानी प्रतिनिधिमंडल प्रमुख

खाड़ी देशों और सुरक्षा पर क्या असर पड़ा?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का असर खाड़ी देशों पर भी दिख रहा है। 7 अप्रैल को एक दो हफ्ते का युद्धविराम तय हुआ था, जो अब खत्म होने वाला है। इस बीच कुवैत ने ईरान और उसके समर्थकों पर ड्रोन हमले करने का आरोप लगाया है। बातचीत में नाकामी के बाद अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अगले दो दिनों में पाकिस्तान में फिर से बातचीत हो सकती है।