अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है, जिसका कुवैत ने खुलकर समर्थन किया है। इस समझौते से अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का आना-जाना आसान होगा और पूरे इलाके में शांति लौटेगी। इस खबर के बाद ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है।
समझौते की मुख्य बातें
यह समझौता एक Memorandum of Understanding (MoU) है। इसके तहत दोनों देशों के बीच सैन्य ऑपरेशन तुरंत बंद होंगे और ईरान के बंदरगाहों की अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटा ली जाएगी। साथ ही, अमेरिका ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाएगा और ईरान की जमी हुई संपत्ति वापस करेगा।
इस डील में ईरान के विकास और पुनर्निर्माण के लिए एक प्राइवेट फंड बनाने की बात कही गई है, जिससे लगभग 300 अरब डॉलर तक की राशि मिल सकती है। अमेरिका और ईरान को अंतिम डील के लिए 60 दिन का समय दिया गया है, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी बात होगी।
कुवैत और अन्य देशों की प्रतिक्रिया
कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते को क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक जरूरी कदम बताया है। मंत्रालय ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की तारीफ की है जिन्होंने दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाया। कुवैत ने उम्मीद जताई है कि इससे पड़ोसी देशों के बीच आपसी सम्मान और भरोसा बढ़ेगा और बाहरी दखल खत्म होगा।
कुवैत के संयुक्त राष्ट्र प्रतिनिधि एम्बेसेडर Nasser Al-Hain ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के व्यापार के लिए एक मुख्य नस की तरह है और इसकी सुरक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने ईरान से अपील की कि वह इस समझौते को पूरी ईमानदारी से निभाए और पड़ोसी देशों को डराने वाले काम बंद करे।
बड़े नेताओं के बयान और ताजा अपडेट
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 18 जून 2026 को इस डील पर हस्ताक्षर किए और नौसेना की नाकाबंदी हटाने का आदेश दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने बताया कि यह समझौता साइन होते ही लागू हो गया है और ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोल दिया है।
हालांकि, ईरान के negotiator Mohammad Bagher Ghalibaf ने संकेत दिया है कि पहले 60 दिनों तक जहाजों से कोई टोल नहीं लिया जाएगा, लेकिन उसके बाद ट्रांजिट शुल्क लगाया जा सकता है।
बाजार पर असर
इस शांति समझौते की खबर मिलते ही कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है। Brent crude oil की कीमत गिरकर 79 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई है, जो काफी समय बाद इस स्तर पर पहुंची है। नाटो चीफ Mark Rutte ने भी इस कदम को दुनिया के लिए एक बड़ी जीत बताया है।