अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब एक बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गई है। एक तरफ अमेरिकी अधिकारी दावा कर रहे हैं कि ईरान अब इलाके में मिलिटिया को पैसा देना बंद करेगा, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन बातों को पूरी तरह गलत बताया है। दुनिया भर की नजरें अब 14 जून को जेनेवा में होने वाली उस मीटिंग पर हैं, जहां इस विवाद को खत्म करने के लिए दस्तखत हो सकते हैं।

ℹ: Trump और Iran की डील पर छिड़ी जंग, लीक हुई शर्तों को ट्रंप ने नकारा, Strait of Hormuz में ड्रोन हमले से हड़कंप

समझौते की मुख्य बातें और शर्तें

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कन्फर्म किया कि ईरान के साथ होने वाले समझौते में कुछ बड़ी शर्तें शामिल हैं। इसके तहत ईरान को आतंकवादी समूहों की फंडिंग रोकनी होगी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सबके लिए खोलना होगा। इसके अलावा, यह भी खबर आई है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान को अपने देश के अंदर ही यूरेनियम को कम करने (Dilute) की अनुमति दे सकते हैं, जिसकी निगरानी संयुक्त राष्ट्र (UN) के निरीक्षक करेंगे।

डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों कहा फेक न्यूज़

जहां एक तरफ अधिकारियों की बात सामने आई, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान द्वारा लीक की गई शर्तों को ‘फेक न्यूज़’ करार दिया। ट्रंप ने कहा कि इन बातों का सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है और ईरान के साथ डील करना बहुत बेईमानी भरा काम है। उन्होंने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय जहाजों पर हुए ईरानी ड्रोन हमले की भी कड़ी निंदा की।

ईरान की मांगें और जेनेवा मीटिंग की तैयारी

ईरान ने अपनी कुछ सख्त शर्तें रखी हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिका को उनके 12 बिलियन डॉलर के जमे हुए पैसे तुरंत वापस करने होंगे। साथ ही, लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रही जंग को रोकना भी उनकी मुख्य मांग है। खबरों के मुताबिक, 14 जून को जेनेवा में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर साइन हो सकते हैं, जिसमें अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बाक़िर क़ालिबफ शामिल हो सकते हैं।

मध्यस्थता में अन्य देशों का रोल

इस तनाव को कम करने में कई देशों ने अहम भूमिका निभाई है। कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच डिप्लोमैटिक बातचीत करवाने में मदद की है। वहीं, बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा ने राष्ट्रपति ट्रंप से इस मुद्दे पर चर्चा की। मिस्र के राष्ट्रपति सिसी ने भी ईरानी राष्ट्रपति पेज़ेशकियन से मुलाकात कर इस समझौते को आगे बढ़ाने की बात की थी।