अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब खत्म हो सकता है. दोनों देशों ने एक समझौते (MoU) पर सहमति जताई है, जिस पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में दस्तखत होंगे. इस खबर से पूरी दुनिया में शांति की उम्मीद जगी है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भी गिरावट देखी गई है.
कतर ने जताई खुशी
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Majed al-Ansari ने इस बातचीत पर अपनी खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि इस समझौते से इलाके में स्थिरता आएगी और टकराव खत्म होगा. कतर ने इस मामले में पाकिस्तान की मध्यस्थता का समर्थन किया है और खुद भी इस प्रक्रिया में पूरी मदद कर रहा है.
Al-Ansari ने यह भी कहा कि अगर यह समझौता सफल रहता है, तो Strait of Hormuz में जहाजों का आना-जाना फिर से शुरू हो सकेगा. इससे कतर को अपनी liquefied natural gas (LNG) की सप्लाई जारी रखने में आसानी होगी.
समझौते की मुख्य बातें
- दस्तखत की तारीख: 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के Burgenstock रिसॉर्ट में MoU पर साइन होंगे.
- परमाणु कार्यक्रम: अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ किया कि इस डील का मुख्य मकसद यह पक्का करना है कि ईरान परमाणु हथियार न बना सके.
- अगला कदम: ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi और डिप्टी विदेश मंत्री Majid Takht-Ravanchi ने बताया कि शुक्रवार को परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम समझौते के लिए बातचीत शुरू होगी.
- प्रतिनिधित्व: ईरान की तरफ से संसदीय स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf आगे की बातचीत का नेतृत्व करेंगे.
हालांकि, कतर के प्रवक्ता ने यह भी आगाह किया कि परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दों को सुलझाने में कुछ दिन नहीं लगेंगे. इसके लिए समय और आपसी भरोसे की जरूरत होगी. इस signing ceremony में पाकिस्तानी और कतरी अधिकारी भी मौजूद रहेंगे.