अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े समझौते की तैयारी चल रही है जिससे दुनिया भर के बाजार और सुरक्षा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम के तहत अमेरिका ने सहमति जताई है कि जब तक अंतिम डील नहीं हो जाती, तब तक वह ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा। इस खबर से मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद जगी है।
समझौते में क्या है खास
ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ड्राफ्ट में 14 मुख्य बिंदु शामिल हैं। इसमें यह बात कही गई है कि 60 दिनों की बातचीत के दौरान अमेरिका न तो क्षेत्र में अपनी सेना बढ़ाएगा और न ही नए प्रतिबंध लगाएगा। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस डील के तहत अमेरिका ईरान के तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है और ईरान के अरबों डॉलर के फ्रीज किए हुए फंड को वापस दे सकता है। साथ ही, लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकने की बात कही गई है।
हस्ताक्षर को लेकर अलग-अलग दावे
इस समझौते पर साइन कब होंगे, इसे लेकर दोनों देशों के बयानों में अंतर दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 14 जून को ऐलान किया था कि डील इसी रविवार को साइन होगी और इसके तुरंत बाद Strait of Hormuz सबको खुला रहेगा। उन्होंने इस समझौते को परमाणु हथियारों के खिलाफ एक बड़ी दीवार बताया और संकेत दिया कि अमेरिका ईरान के परमाणु मटेरियल को अपने कब्जे में ले सकता है।
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने स्पष्ट किया कि रविवार को हस्ताक्षर नहीं होंगे, लेकिन आने वाले दिनों में यह हो सकता है। विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी कहा कि हालांकि समझौता करीब है, लेकिन ईरान ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है।
तनाव और विरोध अभी भी जारी
जहां एक तरफ कतर और पाकिस्तान इस डील को कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, वहीं ईरान के अंदर इस समझौते का विरोध भी हो रहा है। 14 जून को तेहरान और मशहद में कट्टरपंथियों ने अमेरिका के साथ इस डील के खिलाफ रैलियां निकालीं।
साथ ही, समुद्र में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिकी सैन्य कमान ने पुष्टि की है कि उन्होंने हाल ही में Strait of Hormuz में ईरान के कई ड्रोन गिराए हैं। वहीं ईरानी समाचार एजेंसियों ने बताया कि उनके बलों ने जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की, जिससे इलाके में धमाकों की आवाजें सुनाई दीं।