अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है। राष्ट्रपति Donald Trump ने घोषणा की है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली जाएगी। इस खबर से पूरी दुनिया और खासकर खाड़ी देशों में बड़ी राहत मिली है क्योंकि यह समुद्री रास्ता व्यापार के लिए बहुत जरूरी है।

इस समझौते की जानकारी रविवार, 14 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने साझा की। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ डील पूरी हो गई है और उन्होंने इस समुद्री रास्ते को बिना किसी टोल के खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को तुरंत हटाने का आदेश दे दिया है।

स्विट्जरलैंड में होगा आधिकारिक हस्ताक्षर

इस शांति समझौते पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर 19 जून 2026, शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में किए जाएंगे। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह साफ किया है कि इस रास्ते को पूरी तरह खोलने का काम शुक्रवार को समझौते पर साइन होने के बाद ही होगा, ताकि समुद्र से बारूदी सुरंगों (mines) को हटाया जा सके।

दूसरी तरफ, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने समझौते की पुष्टि की है, लेकिन उन्होंने कहा कि ईरान इसे तब लागू करेगा जब इस पर आधिकारिक तौर पर साइन हो जाएंगे। ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस समझौते में समुद्री रास्ते को ईरानी व्यवस्था के तहत 30 दिनों के भीतर खोलने की बात कही गई है।

युद्ध विराम और अन्य महत्वपूर्ण शर्तें

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने पुष्टि की कि दोनों पक्षों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान को तुरंत और स्थायी रूप से बंद कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने भी इस फैसले का स्वागत किया है।

इस समझौते की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • यह एक शांति ढांचा है, जिसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर 60 दिनों तक बातचीत होगी।
  • ईरान की जमी हुई संपत्ति में से शुरुआती 12 अरब डॉलर जारी किए जाएंगे और बाद में 12 अरब डॉलर और दिए जाएंगे।
  • ईरान के तेल और ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों को निलंबित कर दिया जाएगा।
  • ईरान के मिसाइल कार्यक्रम और सशस्त्र समूहों को दिए जाने वाले समर्थन को इस समझौते से बाहर रखा गया है।

इस पूरे मामले में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ के रूप में बड़ी भूमिका निभाई है। यह विवाद फरवरी 2026 के अंत में शुरू हुआ था, जिसमें अमेरिका, इसराइल और ईरान शामिल थे। खबरों के मुताबिक, ईरान के भीतर कुछ कट्टरपंथी इस डील का विरोध कर रहे हैं। साथ ही, रविवार को लेबनान में इसराइल की सैन्य कार्रवाई की वजह से यह समझौता लगभग खतरे में पड़ गया था।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com