अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है. दोनों देशों के प्रतिनिधियों को शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में मिलना था, लेकिन अब इस मीटिंग पर संशय बना हुआ है. इस समझौते की खबर से दुनिया भर के बाजारों में हलचल तेज हो गई है.

क्या है पूरा मामला

17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MOU) पर डिजिटल साइन किए. इस समझौते का मुख्य मकसद अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को रोकना और शांति बहाल करना है.

समझौते की मुख्य बातें

  • सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से बंद किए जाएंगे, जिसमें लेबनान भी शामिल है.
  • दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई या धमकी से बचेंगे.
  • ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत दोबारा खोलेगा.
  • अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का फैसला किया है.
  • ईरान के तेल क्षेत्र के लिए अमेरिका तुरंत प्रतिबंधों में ढील (waivers) देगा.
  • ईरान ने भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा.

मीटिंग में क्यों आई देरी

स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक रिसॉर्ट में शुक्रवार, 19 जून को शुरुआती बातचीत होनी थी. लेकिन व्हाइट हाउस ने बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की यात्रा में कुछ तकनीकी और लॉजिस्टिक कारणों से देरी हुई है. वहीं, ईरान ने भी अपनी टीम की फ्लाइट कैंसिल कर दी है. ईरान ने इस फैसले की वजह लेबनान में इजराइल के हमलों को बताया है और कहा है कि लेबनान का मुद्दा बातचीत के लिए बहुत जरूरी है.

आगे क्या होगा

इस समझौते के बाद अब 60 दिनों की बातचीत का समय शुरू हो गया है. इस दौरान एक फाइनल डील तैयार की जाएगी, जिसमें परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय मुद्दों को सुलझाया जाएगा. इस फाइनल डील में ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए क्षेत्रीय भागीदारों के साथ मिलकर 300 अरब डॉलर के प्लान पर भी चर्चा होगी.

नेताओं की प्रतिक्रिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि वह शांति के लिए प्रतिबद्ध हैं और बाजार की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है, जिससे तेल की कीमतें गिरी हैं. दूसरी तरफ, अमेरिकी सीनेट के डेमोक्रेटिक नेता चक शुमर ने इस डील की आलोचना की है. ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि अगर समझौते का उल्लंघन हुआ, तो तेहरान कड़ा जवाब देगा.