अमेरिका और ईरान के बीच सालों पुराने झगड़े को खत्म करने की तैयारी शुरू हो गई है। दोनों देशों के बड़े अधिकारी स्विट्जरलैंड में मिलने वाले हैं। इस मुलाकात का मुख्य मकसद पश्चिम एशिया में शांति लाना और आपसी तनाव को कम करना है। इसके लिए एक समझौता (MoU) पहले ही तैयार किया गया है।

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बातचीत की तैयारी और समय

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत Steve Witkoff और उनके सलाहकार Jared Kushner स्विट्जरलैंड पहुंच रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi भी शनिवार, 20 जून 2026 को वहां पहुंचेंगे। पहले यह मुलाकात शुक्रवार को होनी थी, लेकिन लेबनान में जारी लड़ाई की वजह से इसे टालना पड़ा था। अब जब Israel और Hezbollah के बीच युद्धविराम (ceasefire) हो गया है, तब यह बातचीत फिर से शुरू हो रही है।

समझौते में क्या खास बातें हैं

इस पूरी बातचीत का आधार एक 14 पॉइंट्स वाला समझौता है। अगर दोनों पक्ष इस पर सहमत होते हैं, तो इसके बाद 30 दिनों तक गहन बातचीत चलेगी। इस योजना के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • व्यापार और रास्ता: Hormuz की जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोला जाएगा।
  • प्रतिबंध: अमेरिका ईरान पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दे सकता है।
  • परमाणु नियम: ईरान को अगले 12 से 15 साल तक यूरेनियम बनाने के काम पर रोक लगानी होगी।
  • नागरिक उपयोग: बाद में ईरान केवल बिजली या दवा जैसे नागरिक कामों के लिए 3.67% तक यूरेनियम बना सकेगा।
  • निगरानी: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों की निगरानी स्वीकार करेगा।

शांति के लिए अगला कदम

इस समझौते के तहत युद्धविराम की अवधि को 60 दिनों के लिए और बढ़ाया जाएगा ताकि परमाणु मुद्दों पर बातचीत शांति से पूरी हो सके। इस पूरी प्रक्रिया में Qatar और अमेरिका ने अहम भूमिका निभाई है। लेबनान के हालात अब धीरे-धीरे सुधर रहे हैं, जिसका असर ईरान के फैसले पर भी दिख रहा है।