अमेरिका और ईरान के बीच एक बहुत बड़ा समझौता होने जा रहा है, जिससे दुनिया भर की नजरें अब स्विट्जरलैंड पर टिकी हैं। आने वाले 19 जून को दोनों देशों के बीच एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस डील के जरिए लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध रोकने और शांति लाने की कोशिश की जा रही है।

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इस समझौते के तहत अगले 60 दिनों का समय तय किया गया है, जिसमें अमेरिका और ईरान के अधिकारी परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों जैसे बड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे। अमेरिका ने भरोसा दिलाया है कि वह समुद्री नाकाबंदी को खत्म करेगा और 30 दिनों के भीतर जहाजों की आवाजाही को पहले जैसा कर देगा। साथ ही, ईरान को तेल और पेट्रोकेमिकल्स निर्यात करने की मंजूरी भी जल्द दी जाएगी।

समझौते की मुख्य बातें

विवरण जानकारी
हस्ताक्षर की तारीख 19 जून, 2026
हस्ताक्षर की जगह स्विट्जरलैंड
बातचीत की समय सीमा 60 दिन
समुद्री नाकाबंदी हटाने का समय 30 दिन
प्रस्तावित आर्थिक मदद 300 बिलियन डॉलर (शर्तों के साथ)

इस डील को लेकर कुछ विवाद भी सामने आए हैं। ईरान चाहता है कि उसके फ्रीज किए गए पैसे तुरंत वापस मिलें, लेकिन अमेरिका का कहना है कि पैसा तभी मिलेगा जब ईरान अपनी जिम्मेदारियां पूरी करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने यह भी साफ किया है कि यह समझौता अभी अंतिम नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने नियमों का पालन नहीं किया, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है।

वहीं दूसरी तरफ, इसराइल ने इस समझौते पर अपनी असहमति जताई है। इसराइली अधिकारियों का कहना है कि Trump की यह डील उन पर लागू नहीं होती। इसराइली सेना ने लेबनान में अपनी मौजूदगी जारी रखने का संकेत दिया है और 17 जून को दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले भी किए हैं।

G7 देशों के नेताओं ने इस कदम की तारीफ की है और इसे एक बड़ा मौका बताया है। उन्होंने लेबनान में तुरंत युद्ध रोकने और हिजबुल्ला के निशस्त्रीकरण की मांग की है। लेबनान के राष्ट्रपति Joseph Aoun ने कहा है कि इसराइल के साथ उनकी बातचीत इस अमेरिकी-ईरानी डील से अलग है।