अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता होने की उम्मीद बढ़ गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि शांति समझौते को लेकर बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। इस संभावित समझौते में 60 दिनों का सीजफायर बढ़ाना, Strait of Hormuz (होर्मुज जलडमरूमध्य) को फिर से खोलना और ईरान को तेल बेचने की अनुमति देना शामिल है। हालांकि इस समझौते की खबरों से इजराइल की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं और क्षेत्र के दूसरे देश भी इस पर नजर बनाए हुए हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच इस समझौते में क्या-क्या शामिल है?

इस समझौते को मुख्य रूप से परफॉर्मेंस के बदले राहत के सिद्धांत पर तैयार किया गया है। इसका मतलब है कि समुद्री रास्तों को जितनी जल्दी खोला जाएगा, उतनी ही जल्दी प्रतिबंधों से राहत मिलेगी। समझौते के मुख्य बिंदुओं को नीचे दी गई तालिका में समझा जा सकता है:

समझौते के मुख्य बिंदु विवरण (Details)
सीजफायर अवधि क्षेत्र में 60 दिनों के लिए सीजफायर को बढ़ाया जाएगा।
Strait of Hormuz समुद्री यातायात के लिए इसे फिर से खोला जाएगा, जिसका प्रबंधन ईरान और ओमान मिलकर करेंगे।
तेल की बिक्री ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्वतंत्र रूप से तेल बेचने की अनुमति दी जाएगी।
अमेरिकी सेना 60 दिनों की अवधि तक अमेरिकी सेना क्षेत्र में रहेगी और अंतिम समझौता होने पर ही जाएगी।
परमाणु कार्यक्रम ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने और अपने संवर्धित यूरेनियम स्टॉक को हटाने पर बातचीत के लिए सहमत होगा।
इजराइल और लेबनान संकट लेबनान में इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त किया जाएगा।

इस समझौते को लेकर किस देश और एक्सपर्ट्स का क्या कहना है?

इस संभावित समझौते पर अलग-अलग देशों और एक्सपर्ट्स की अलग प्रतिक्रिया आई है:

  • ट्रंप और अमेरिकी प्रशासन: राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि समझौते का मसौदा तैयार है और सीनेटर मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि इसकी घोषणा कुछ ही घंटों में हो सकती है। हालांकि, अमेरिका ईरान की संपत्ति को तब तक अनफ्रीज नहीं करेगा जब तक वह ठोस कदम नहीं उठाता।
  • ईरान का रुख: ईरान की Fars न्यूज एजेंसी ने ट्रंप के दावों को वास्तविकता से अलग बताया है। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि उनकी बातचीत का मुख्य उद्देश्य लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध को समाप्त करना है।
  • इजराइल की आपत्ति: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान में संघर्ष खत्म करने के प्रावधान पर अपनी चिंता जताई है। इजराइल के एक वरिष्ठ सुरक्षा सूत्र ने दावा किया कि वर्तमान रूप में इस समझौते पर हस्ताक्षर करना इजराइल के लिए नुकसानदेह होगा।

क्षेत्रीय देशों की भूमिका और ट्रिटा पारसी का विश्लेषण

Quincy Institute के एक्सपर्ट ट्रिटा पारसी (Trita Parsi) का कहना है कि यह नया फ्रेमवर्क काफी हद तक पुराने सीजफायर समझौते की तरह है जिसे पहले ब्लॉक करके बिगाड़ दिया गया था। उन्होंने बताया कि इस समझौते को आगे बढ़ाने में पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, कतर और ओमान जैसे क्षेत्रीय देशों ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। क्षेत्रीय देशों के सहयोग से राष्ट्रपति ट्रंप को अपने घरेलू विरोधियों का सामना करने में मदद मिलेगी। पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने हालांकि इस समझौते का विरोध करते हुए कहा है कि यह ईरान को फायदा पहुंचाएगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या अमेरिका ईरान पर लगे सारे प्रतिबंध तुरंत हटा देगा?

नहीं, अमेरिका ईरान की संपत्ति को तब तक अनफ्रीज नहीं करेगा या प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटाएगा जब तक कि ईरान परमाणु हथियारों को न बनाने और यूरेनियम स्टॉक को हटाने के मामले में ठोस कदम नहीं उठाता।

इस समझौते को कराने में किन देशों ने मध्यस्थता की है?

इस समझौते को सफल बनाने में पाकिस्तान, सऊदी अरब, यूएई, कतर और ओमान जैसे क्षेत्रीय देशों ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।