अमेरिका और ईरान के बीच सालों से चल रही तनातनी अब खत्म होने वाली है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच एक बड़ा समझौता लगभग पूरा हो चुका है। इस डील के बाद युद्ध रुक सकता है और कई बड़े मुद्दे हल हो सकते हैं, हालांकि ईरान ने अभी इस पर अपनी अंतिम मुहर नहीं लगाई है।

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क्या है इस समझौते का पूरा प्लान

खबरों के मुताबिक एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है जिसमें 60 दिनों की बातचीत का समय तय हुआ है। इस दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उन पर लगे प्रतिबंधों को हटाने और हर्जाने जैसे बड़े मुद्दों को सुलझाया जाएगा। अगर यह डील पक्की होती है, तो अमेरिका ईरान के जाम किए हुए 24 अरब डॉलर वापस कर सकता है और ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी हटा सकता है। इसके बदले में ईरान को 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना होगा।

ट्रंप और ईरान के दावों में अंतर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि एक शानदार समझौता लगभग पूरा हो गया है और इसे आने वाले कुछ दिनों में यूरोप में साइन किया जा सकता है। इस मौके पर उपराष्ट्रपति JD Vance भी मौजूद रह सकते हैं। ट्रंप का लक्ष्य यह है कि ईरान कभी परमाणु हथियार न बना पाए। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने कहा है कि अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ईरान की सरकारी मीडिया का कहना है कि वे यूरेनियम समृद्ध करने के अपने अधिकार को नहीं छोड़ेंगे और किसी भी दबाव में नहीं आएंगे।

बातचीत के बीच तनाव अब भी जारी

एक तरफ जहां कागजों पर शांति की बात हो रही है, वहीं जमीनी हालात अब भी खराब हैं। 11 जून को अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के दो ड्रोन गिराए। ये ड्रोन व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की कोशिश कर रहे थे। यह घटना दिखाती है कि बातचीत के बावजूद दोनों देशों के बीच भरोसा पूरी तरह नहीं लौटा है।

अन्य देशों की भूमिका

इस पूरे मामले में कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी, जिसकी वजह से जमी हुई संपत्ति के मुद्दे पर बातचीत शुरू हो पाई। इस बीच, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ट्रंप का समर्थन किया है। उनका कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना बहुत जरूरी है।