अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान में कोई पैसा निवेश नहीं कर रहा है। ट्रंप ने बताया कि ईरान के साथ हुआ समझौता अब दूसरे चरण में पहुंच गया है। इस खबर से पूरी दुनिया की नजरें अब स्विट्जरलैंड पर टिकी हैं।

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डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए बताया कि ईरान के साथ एक डील पूरी हो चुकी है। इसके तहत ईरान के बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की पाबंदी हट जाएगी और Strait of Hormuz को फिर से खोल दिया जाएगा। उम्मीद है कि 19 जून 2026 तक यह रास्ता पूरी तरह खुल जाएगा और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो जाएगी।

स्विट्जरलैंड में होगा बड़ा समझौता

आने वाली 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर औपचारिक तौर पर दस्तखत होंगे। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति J.D. Vance इस समारोह में शामिल होंगे, जबकि ईरान की तरफ से उनके टॉप बातचीत करने वाले मोहम्मद बागर गालिबाफ आएंगे। इसी दिन ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई बातचीत भी शुरू हो सकती है।

परमाणु हथियार और पैसों का मामला

राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया कि ईरान ने अब कभी परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है। उन्होंने 300 मिलियन डॉलर के भुगतान की खबरों को गलत बताया। वहीं, उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने कहा कि ईरान को 300 बिलियन डॉलर का निवेश फंड दिया जा सकता है, लेकिन यह कोई तोहफा नहीं होगा बल्कि कुछ शर्तों पर आधारित होगा। साथ ही, IAEA और अमेरिका ईरान के परमाणु स्टॉक को खत्म करने में मदद करेंगे।

लेबनान और पाकिस्तान की भूमिका

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, इस शांति समझौते में इसराइल द्वारा लेबनान पर कब्जे को खत्म करना भी शामिल है। ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने पुष्टि की है कि इस डील से सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म हो जाएगी। इस पूरे समझौते को करवाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अहम भूमिका निभाई है।

हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने यह चेतावनी भी दी है कि अगर 60 दिनों के भीतर परमाणु समझौता पूरी तरह फाइनल नहीं हुआ, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले शुरू कर सकता है।