अमेरिका और इसराइल के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और उनके साथी JD Vance ने इसराइल के नेताओं को सख्त लहजे में चेतावनी दी है। यह पूरा विवाद अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक नए समझौते को लेकर शुरू हुआ, जिसका इसराइल ने विरोध किया था।
JD Vance ने याद दिलाया हथियारों का हिसाब
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने व्हाइट हाउस की एक ब्रीफिंग के दौरान इसराइल के मंत्रियों, खासकर Itamar Ben-Gvir और Bezalel Smotrich की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि Donald Trump ही दुनिया के इकलौते ऐसे बड़े नेता हैं जो इसराइल के साथ सहानुभूति रखते हैं।
वेंस ने इसराइल को उसकी सैन्य निर्भरता की याद दिलाते हुए कहा कि इसराइल की रक्षा करने वाले दो-तिहाई हथियार अमेरिकी हाथों ने बनाए हैं और इनका पूरा खर्च अमेरिकी टैक्सपेयर्स के पैसे से हुआ है। उन्होंने इसराइल के नेताओं को चेतावनी दी कि वे अपनी एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी ताकत पर हमला करना बंद करें और असलियत को समझें।
Donald Trump का नेतन्याहू पर गुस्सा
राष्ट्रपति Donald Trump ने भी प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने नेतन्याहू को एक बहुत ही मुश्किल व्यक्ति बताया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प ने अपने करीबियों से कहा कि नेतन्याहू हर किसी पर बमबारी करना चाहते हैं और वह अब इस तरह की मांगों से थक चुके हैं। ट्रम्प ने यह भी संकेत दिया कि इसराइल का अस्तित्व अमेरिका और ईरान के खिलाफ उनके कदमों की वजह से बना हुआ है।
क्या है अमेरिका-ईरान समझौता
अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता हुआ है जिसे मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग कहा जा रहा है। इस डील की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- दोनों देशों के बीच 60 दिनों का युद्धविराम लागू होगा।
- अमेरिका ईरान पर लगी पाबंदियों (blockade) को हटाएगा।
- ईरान को अपनी शर्तें पूरी करने पर दोबारा वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़ने का मौका मिलेगा।
हालांकि, इस समझौते का विरोध करने वालों का कहना है कि यह ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को नहीं रोकता।
इसराइल में मची खलबली
अमेरिकी अधिकारियों के इन बयानों के बाद इसराइल के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया। इसराइल सरकार ने फिलहाल कोई सार्वजनिक जवाब नहीं दिया है ताकि ट्रम्प प्रशासन के साथ विवाद और न बढ़े। वहीं, विपक्ष के नेता Yair Lapid ने नेतन्याहू सरकार पर हमला बोला और कहा कि उनकी वजह से अमेरिका जैसे अहम दोस्त के साथ रिश्ते खराब हो रहे हैं।
विश्लेषक Trita Parsi का कहना है कि अमेरिकी नेताओं के ये बयान असल में नेतन्याहू के लिए एक चेतावनी हैं। अमेरिका यह साफ़ करना चाहता है कि इस रिश्ते में असली सुपरपावर अमेरिका है और इसराइल को अपनी सीमाएं समझनी चाहिए।