अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर आ रही है। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति JD Vance ने कहा है कि वाशिंगटन और ईरान के बीच बातचीत अंतिम दौर में है लेकिन अभी दोनों पक्ष पूरी तरह से समझौते पर नहीं पहुंचे हैं। उन्होंने साफ किया कि अमेरिका के पास अभी भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचाने की पूरी क्षमता है। दोनों देशों के बीच 60 दिनों के एक अस्थायी समझौते को लेकर बातचीत चल रही है, जिससे इस क्षेत्र में शांति बहाल की जा सके।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता तय हो गया है?
अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच एक अस्थायी समझौते की रूपरेखा तैयार हुई है। यह समझौता 60 दिनों का एक समझौता ज्ञापन (MOU) होगा, जिसके तहत मौजूदा युद्धविराम को बढ़ाया जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू की जाएगी। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता तब तक अंतिम नहीं माना जाएगा जब तक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पर हस्ताक्षर नहीं कर देते। दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया ने अभी तक इस समझौते की पुष्टि नहीं की है और उनका कहना है कि इस मसौदे को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
जेडी वेंस का बयान और इस समझौते का इतिहास क्या है?
उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने 28 मई 2026 को अमेरिकी वायु सेना अकादमी में एक भाषण के दौरान कहा कि अमेरिकी वायु सेना राष्ट्रपति ट्रंप के उस वादे का समर्थन करती है जिसमें ईरान को कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाने देने की बात कही गई है। इससे पहले 19 मई 2026 को भी वेंस ने कहा था कि बातचीत में अच्छी प्रगति हो रही है लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। दोनों देशों के बीच यह टकराव 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था और अप्रैल में पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई बातचीत भी बेनतीजा रही थी। हाल ही में कुवैत द्वारा ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों को रोकने की घटना के बाद यह युद्धविराम काफी नाजुक स्थिति में आ गया है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अमेरिका और ईरान के बीच नया युद्ध विराम समझौता होने वाला है?
हाँ, अमेरिकी और ईरानी वार्ताकारों के बीच एक अस्थायी 60-दिवसीय समझौता ज्ञापन (MOU) तैयार किया गया है, लेकिन इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अंतिम मंजूरी मिलना बाकी है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका का क्या स्टैंड है?
उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा और अमेरिका के पास अभी भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी पीछे धकेलने की क्षमता है।