अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब पूरी तरह अटक गई है। ईरान के अंदर मचे घमासान और वहां के नेतृत्व के संकट ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ जहां ट्रंप प्रशासन स्थायी शांति चाहता है, वहीं दूसरी तरफ ईरान के अंदरूनी हालात बातचीत में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
ईरान में नेतृत्व का संकट और अंदरूनी हालात क्या हैं?
ईरान में इस समय भारी राजनीतिक उथल-पुथल मची है। 28 फरवरी 2026 को अमेरिकी-इजरायली हमलों में सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और कई बड़े नेताओं की मौत हो गई थी। उनके बाद उनके बेटे मोज्तबा खामेनी को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है, लेकिन वे अब तक जनता के सामने नहीं आए हैं। फिलहाल वहां एक प्रोविजनल लीडरशिप काउंसिल कामकाज संभाल रही है, जिसमें राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और अन्य बड़े अधिकारी शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बताया कि ईरान के अंदर हार्डलाइन और नरम गुटों के बीच गहरी फूट है। उन्होंने कहा कि यह साफ नहीं है कि ईरानी बातचीत करने वालों के पास कोई फैसला लेने का अधिकार है भी या नहीं। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान ने खुद उन्हें बताया है कि उनका देश पूरी तरह से ढहने की स्थिति में है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी और नया प्रस्ताव क्या है?
क्षेत्र में तनाव तब और बढ़ गया जब 21 अप्रैल 2026 को ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में शिपिंग ट्रैफिक पर पूरी तरह नाकाबंदी कर दी। इसके बाद 27 अप्रैल को ईरान ने एक नया प्रस्ताव दिया। ईरान ने कहा कि अगर अमेरिका अपनी नाकाबंदी हटाता है और युद्ध खत्म करता है, तो वह शिपिंग रास्ता खोल देगा, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को कुछ समय के लिए टाल दिया जाएगा।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव करोलिन लेविट ने पुष्टि की कि इस प्रस्ताव पर चर्चा हो रही है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि राष्ट्रपति ट्रंप की कुछ शर्तें बहुत सख्त हैं। दूसरी तरफ, सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप इस बात पर अड़े हैं कि जब तक परमाणु मुद्दा हल नहीं होता, तब तक सिर्फ रास्ता खोलना काफी नहीं होगा।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत क्यों नहीं बन पा रही?
दोनों देशों के बीच भरोसे की भारी कमी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि अमेरिका की मांगें अनुचित हैं और वह बार-बार अपना फैसला बदलता रहता है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ईरान धमकी के साये में कोई समझौता नहीं करेगा और पहले अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म होनी चाहिए।
- अमेरिका का रुख: मार्को रुबियो ने ईरान की क्षेत्रीय भूमिका और परमाणु महत्वाकांक्षाओं को मुख्य रुकावट बताया है।
- क्षेत्रीय प्रभाव: इस तनाव को देखते हुए 28 अप्रैल को सऊदी अरब में खाड़ी देशों के नेता इकट्ठा हुए ताकि इस युद्ध के असर पर चर्चा की जा सके।
- अन्य देशों की राय: फ्रांस ने कहा कि ईरान को बड़ी रियायतें देनी होंगी, जबकि कतर ने चेतावनी दी कि अगर समाधान नहीं निकला तो यह एक लंबा खिंचने वाला विवाद बन जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान के नए सुप्रीम लीडर कौन हैं और वे कहां हैं
मोज्तबा खामेनी को नया सुप्रीम लीडर नामित किया गया है, लेकिन वे अब तक सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए हैं। फिलहाल ईरान की सत्ता प्रोविजनल लीडरशिप काउंसिल के हाथों में है।
होर्मुज जलडमरूमध्य विवाद का आम लोगों पर क्या असर होगा
होर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी से दुनिया भर में तेल और शिपिंग ट्रैफिक प्रभावित होता है, जिससे सामान महंगा हो सकता है और खाड़ी देशों में अस्थिरता बढ़ सकती है।