अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान के साथ राजनयिक बातचीत आगे बढ़ रही है, भले ही राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनके ताज़ा प्रस्ताव को खारिज कर दिया हो। अमेरिका का पूरा जोर इस बात पर है कि ईरान किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
क्या है अमेरिका का मुख्य मुद्दा और ट्रंप का रुख?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालिया प्रस्ताव को पूरी तरह से खारिज कर दिया था और इसे ‘अस्वीकार्य’ और ‘कचरा’ बताया था। ट्रंप ने साफ़ किया कि अमेरिका के लिए सबसे बड़ी ‘रेड लाइन’ यह है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होने चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका अपनी बात पर अडिग रहेगा और जरूरत पड़ने पर राजनयिक या सैन्य दोनों तरह के विकल्पों का इस्तेमाल कर सकता है।
बातचीत में कौन शामिल हैं और क्या है रणनीति?
उपराष्ट्रपति JD Vance ने 13 और 14 मई 2026 को पुष्टि की कि बातचीत काफी संवेदनशील है लेकिन जारी है। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ खास लोगों और देशों की अहम भूमिका है:
- Jared Kushner और Steve Witkoff: ये राष्ट्रपति ट्रंप के दूत हैं जो बातचीत का समन्वय कर रहे हैं।
- पाकिस्तान: पाकिस्तान इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थ (mediator) के तौर पर काम कर रहा है।
- अरब सहयोगी: अमेरिका इस मामले में अरब जगत के अपने साथियों से भी लगातार सलाह ले रहा है।
जमीनी हालात और समुद्र में बढ़ता तनाव
एक तरफ बातचीत चल रही है, वहीं दूसरी तरफ समुद्र में तनाव बढ़ा हुआ है। Strait of Hormuz में ईरान की सैकड़ों फास्ट-अटैक बोट्स देखी गई हैं और ईरान ने इस इलाके के अपने परिचालन क्षेत्र को बढ़ा दिया है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, ईरान के खिलाफ अब तक करीब 29 अरब डॉलर का खर्च आ चुका है। फिलहाल अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी (naval blockade) जारी रखी है। ईरान के प्रस्ताव में समुद्री हमलों को रोकने और अपनी संपत्ति को अनफ्रीज करने की मांग की गई थी, जिसे अमेरिका ने नहीं माना।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका ने ईरान के ताज़ा प्रस्ताव को क्यों खारिज किया?
राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रस्ताव को ‘कचरा’ और ‘अस्वीकार्य’ बताया क्योंकि इसमें परमाणु बातचीत को टालने और अन्य ऐसी मांगें थीं जो अमेरिका की शर्तों पर खरी नहीं उतरीं।
ईरान के साथ चल रही बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस बातचीत का सबसे प्रमुख उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार न बना सके।
