अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 13 दिनों से चल रहे संघर्ष के बाद अब कूटनीति के जरिए शांति लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। 28 जुलाई 2026 तक दोनों देशों के बीच सीधे हमलों पर 3 दिनों से रोक लगी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बातचीत के जरिए शांति समझौते की उम्मीद जताई है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर बातचीत का नतीजा नहीं निकला तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है।
शांति बहाली के लिए मध्यस्थता जारी
Qatar और Pakistan जैसे देशों ने मध्यस्थता करते हुए बातचीत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत Mike Waltz ने पुष्टि की कि हमलों में यह ठहराव कूटनीति को मौका देने के लिए है, हालांकि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य संपत्ति की मौजूदगी बढ़ा दी गई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने अमेरिका के साथ सीधे बातचीत से इनकार किया है, लेकिन Oman के साथ हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से जुड़े समुद्री यातायात प्रबंधन पर चर्चा जारी रखने की बात कही है।
क्षेत्रीय तनाव और मौजूदा स्थिति
तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, क्योंकि Saudi Arabia, Jordan और Iraq ने अब भी ड्रोन हमलों की सूचना दी है। रविवार को हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे 6 जहाजों में से एक पर हमला भी हुआ। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच यह कोई औपचारिक युद्धविराम नहीं है, बल्कि एक अस्थाई शांति है जिसे लेकर ईरान के भीतर भी अलग-अलग राय बन रही है। वहीं, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने हथियारों की कमी की चिंताओं का जिक्र किया है, हालांकि राष्ट्रपति Trump ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
