अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है. स्विट्जरलैंड में हुई हाई-लेवल मीटिंग के बाद दोनों देशों ने 60 दिनों के अंदर एक आखिरी समझौते पर पहुंचने की सहमति जताई है. इस पूरी बातचीत में कतर और पाकिस्तान ने बीच-बचाव कर अहम भूमिका निभाई है.

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स्विट्जरलैंड में हुई अहम बातचीत

यह हाई-लेवल मीटिंग स्विट्जरलैंड के Burgenstock में हुई थी. पहले यह बातचीत 19 जून 2026 को होनी थी लेकिन कुछ कारणों से इसमें देरी हुई. आखिरकार यह मीटिंग हुई और इसका पहला राउंड सोमवार, 22 जून 2026 को खत्म हुआ. बताया जा रहा है कि बातचीत काफी देर रात तक चली थी. इस मीटिंग से पहले पिछले हफ्ते दोनों देशों ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एक Memorandum of Understanding (MOU) पर साइन किए थे, जिसके बाद बातचीत का रास्ता खुला.

समझौते की मुख्य बातें

दोनों देशों ने एक रोडमैप तैयार किया है ताकि अगले 60 दिनों में फाइनल डील हो सके. इस काम के लिए कुछ खास इंतजाम किए गए हैं:

  • एक High-Level Committee बनाई गई है जो पूरी बातचीत पर नजर रखेगी.
  • लेबनान में मिलिट्री ऑपरेशन को रोकने के लिए एक ‘de-confliction cell’ बनाया जाएगा ताकि शांति बनी रहे.
  • Strait of Hormuz से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए दोनों पक्षों के बीच एक सीधी ‘communication line’ शुरू की गई है ताकि कोई गलतफहमी न हो.

क्या मिला और क्या होगा

ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बताया कि कतर और पाकिस्तान की मदद से काफी तरक्की हुई है. इस बातचीत में ईरान के लिए तेल और पेट्रोकेमिकल एक्सपोर्ट में छूट, ब्लॉकेड हटाना, ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस करना और ईरान के पुनर्निर्माण के लिए एक योजना पर बात हुई है. इस मीटिंग में अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi मुख्य तौर पर शामिल थे. तकनीकी बातों के लिए Jared Kushner और Steve Witkoff ने भी मदद की.

स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने इस बात का स्वागत किया है और कहा कि उन्होंने इस बातचीत के लिए एक सुरक्षित और गुप्त जगह मुहैया कराई थी. हालांकि शुरुआत में कुछ खबरें आई थीं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों की वजह से ईरानी प्रतिनिधि मीटिंग छोड़कर चले गए, लेकिन अमेरिकी डिप्लोमेट्स ने साफ किया कि थोड़ी मुश्किल शुरुआत के बाद बातचीत जारी रही.