अमेरिका और ईरान एक बार फिर आमने-सामने आ सकते हैं. सीज़फायर यानी युद्ध विराम की समय सीमा खत्म होने से पहले दोनों देश नई मीटिंग करने पर विचार कर रहे हैं. हालांकि तनाव इतना ज्यादा है कि अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है. पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या बातचीत से मामला सुलझेगा या हालात और बिगड़ेंगे.
पिछली बातचीत क्यों रही नाकाम और अब क्या होगा
पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत हुई थी. इसमें अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान की तरफ से संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागर कलीबाफ शामिल थे. लेकिन परमाणु हथियारों को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई और बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. अब पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र की मदद से फिर से बातचीत शुरू करने की कोशिश की जा रही है ताकि 21 या 22 अप्रैल तक कोई रास्ता निकल सके.
ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी और अन्य देशों का रुख
बातचीत नाकाम होने के बाद US Central Command ने 13 अप्रैल को सुबह 10 बजे से ईरान के सभी पोर्ट्स और तटीय इलाकों की नाकेबंदी कर दी है. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान डील करना चाहता है. दूसरी तरफ इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध विराम जल्द ही खत्म हो सकता है. सऊदी अरब के विदेश मंत्री ने भी इस मुद्दे पर ईरान के साथ फोन पर चर्चा की है.
