अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने मंगलवार को कतर की राजधानी डोहा में मीटिंग करने की इच्छा जताई है। वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। दोनों देशों के बीच इस बात को लेकर अब बड़ी बहस छिड़ गई है कि आखिर मीटिंग होगी या नहीं।
डोनाल्ड ट्रंप ने 29 जून 2026 को सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ मुलाकात की मांग की है। ट्रंप के मुताबिक यह मीटिंग 30 जून को कतर के डोहा शहर में तय की गई थी।
इस दावे के तुरंत बाद ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबदी सामने आए और उन्होंने इस बात को सिरे से नकार दिया। ग़रीबाबदी ने कहा कि इस हफ्ते डोहा में किसी भी तरह की तकनीकी बातचीत (technical talks) तय नहीं है। उन्होंने साफ किया कि कतर के साथ मशविरा तो चल रहा है, लेकिन मीटिंग की खबरें कन्फर्म नहीं हैं।
ईरान के अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी बातचीत तभी शुरू होगी जब दोनों पक्ष तारीख और जगह पर सहमत होंगे। इससे पहले 28 जून को ईरान के एक अन्य अधिकारी मेहदी फज़ाएली ने भी कहा था कि ईरान ने तकनीकी बातचीत में हिस्सा नहीं लिया क्योंकि अमेरिका ने कुछ शर्तें पूरी नहीं की थीं।
यह पूरा विवाद 17 जून 2026 को साइन हुए एक समझौते (MoU) से जुड़ा है, जिसका मकसद लड़ाई खत्म करना और बातचीत का रास्ता खोलना था। ईरान का कहना है कि जब तक उसकी जमी हुई रकम वापस नहीं मिलती, वह आगे की बातचीत में शामिल नहीं होगा। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कतर द्वारा 6 अरब डॉलर की रकम छोड़ने का जिक्र भी किया था, ताकि इस समझौते को आगे बढ़ाया जा सके।
इस पूरे मामले में कतर एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन बिन जसीम अल-थानी ने पहले ही कहा था कि मौजूदा समझौता बातचीत के लिए एक सही ढांचा प्रदान करता है।
