अमेरिका और ईरान ने अब आपसी लड़ाई को रोकने और बातचीत करने का फैसला किया है। दोनों देश होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के विवाद को सुलझाने के लिए कतर की राजधानी दोहा में मिलेंगे। इस फैसले से उम्मीद है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर तनाव कम होगा और जहाजों की आवाजाही सुरक्षित होगी।
अमेरिका के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि दोनों पक्षों ने “काइनेटिक एक्टिविटी” को रोकने पर सहमति जताई है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि अब दोनों देश एक-दूसरे पर सैन्य हमले या फिजिकल अटैक नहीं करेंगे। इस विवाद को खत्म करने के लिए तकनीकी बातचीत मंगलवार, 30 जून 2026 को दोहा में होगी।
यह फैसला उस समय आया है जब पिछले कुछ दिनों में हालात काफी बिगड़ गए थे। ईरान पर कमर्शियल जहाजों पर हमले करने का आरोप लगा, जिसके बाद अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए। जवाब में ईरान ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी बेस पर हमले कर दिए थे। इस वजह से 11 दिन पहले हुआ युद्धविराम काफी कमजोर पड़ गया था।
दोनों देशों के बीच जून 2026 में एक समझौता (MOU) हुआ था। इस समझौते के तहत ईरान ने वादा किया था कि वह कमर्शियल जहाजों के सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने की पूरी कोशिश करेगा। बदले में अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने की बात कही थी। इसके अलावा, पिछले हफ्ते स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के दौरान अमेरिकी सेना और ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के बीच एक सीधा “हॉटलाइन” नंबर शुरू करने का फैसला हुआ था, लेकिन शनिवार, 27 जून तक यह शुरू नहीं हो पाया था।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि शुरुआती शांति समझौते के तहत जलमार्ग के ट्रैफिक को मैनेज करने का पूरा अधिकार सिर्फ ईरान के पास है। हालांकि अमेरिका ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है।
अमेरिकी राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा है कि राष्ट्रपति ट्रंप बातचीत के पक्ष में हैं, लेकिन उनका धैर्य सीमित है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर अंतरराष्ट्रीय जहाजों को फिर से खतरा हुआ, तो अमेरिका ईरान के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना जारी रखेगा। दोहा में होने वाली बैठक में अमेरिका की तकनीकी टीम का नेतृत्व जैक स्टीवर्ट करेंगे।
