अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खत्म होने की राह पर है। दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) का मसौदा तैयार किया गया है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को फिर से सामान्य किया जाएगा। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस समझौते से वैश्विक तेल सप्लाई और समुद्री व्यापार पर लगा बड़ा प्रतिबंध हटने की उम्मीद है। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि वह पूरी जांच-परख के बिना इस पर अंतिम कदम नहीं उठाएगा।

इस समझौते में दोनों देशों के लिए क्या नियम तय किए गए हैं?

इस मसौदे के तहत दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति जताई है, जिससे व्यापारिक जहाजों का रास्ता साफ हो सके।

  • जहाजों की बहाली: ईरान एक महीने के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों के यातायात को युद्ध-पूर्व के स्तर पर बहाल करेगा।
  • अमेरिकी सेना की वापसी: अमेरिका इस क्षेत्र से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और ईरान के पास से अपनी सैन्य मौजूदगी को कम करेगा।
  • ओमान का सहयोग: इस जलडमरूमध्य के माध्यम से जहाज यातायात का प्रबंधन ईरान और ओमान मिलकर करेंगे, जिसमें सैन्य जहाजों को शामिल नहीं किया गया है।
  • अंतरराष्ट्रीय कानून: दोनों देश अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।

क्या यह समझौता अंतिम रूप ले चुका है?

भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते के करीब पहुंचने की बात कही है, लेकिन अधिकारियों के बयानों में थोड़ा अंतर नजर आ रहा है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने बताया कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच अभी भी वैचारिक मतभेद हैं और बातचीत किसी अंतिम फैसले के बहुत करीब नहीं पहुंची है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने संकेत दिया है कि अंतिम समझौते तक पहुंचने में अभी कुछ और दिनों का समय लग सकता है।

अगर अगले 60 दिनों के भीतर इस पर अंतिम मुहर लग जाती है, तो इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक बाध्यकारी प्रस्ताव के रूप में पास किया जा सकता है। इस पूरे मसौदे को तैयार करने में पाकिस्तान ने एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसकी मदद से अप्रैल में युद्धविराम लागू हुआ था।

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य जहाजों को जाने की अनुमति होगी?

नहीं, इस समझौते के मसौदे में सैन्य जहाजों को शामिल नहीं किया गया है। इसमें केवल व्यावसायिक और नागरिक जहाजों की सामान्य आवाजाही को बहाल करने की बात कही गई है।

इस समझौते में पाकिस्तान और ओमान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान ने इस मसौदे को तैयार करने के लिए अप्रत्यक्ष वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। वहीं, ओमान इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के यातायात प्रबंधन में ईरान का सहयोग करेगा।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com