अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म हो सकता है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जानकारी दी है कि दोनों देशों के बीच एक ड्राफ्ट डील तैयार है जिसे आने वाले कुछ दिनों में डिजिटल तरीके से साइन किया जा सकता है. इस समझौते से मिडिल ईस्ट में शांति लौट सकती है और जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकती है.

समझौते की बड़ी शर्तें और प्रावधान

इस प्रस्तावित डील में कई महत्वपूर्ण बातों पर सहमति बनी है ताकि दोनों देशों के बीच लड़ाई को पूरी तरह रोका जा सके. मुख्य प्रावधान नीचे दिए गए हैं:

  • लड़ाई की समाप्ति: सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, युद्ध और लड़ाई को तुरंत और हमेशा के लिए बंद किया जाएगा.
  • अमेरिकी वादा: अमेरिका ईरान की संप्रभुता का सम्मान करेगा और उसके आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा. साथ ही, 13 अप्रैल से ईरानी बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को पूरी तरह हटा लिया जाएगा.
  • ईरान का वादा: ईरान 30 दिनों के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलेगा. इसके अलावा, ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने और आतंकी समूहों को फंड न देने का वादा किया है.

परमाणु कार्यक्रम और समय सीमा

परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों ने एक समय सीमा तय की है ताकि जल्दबाजी में कोई गलती न हो. इस पर चर्चा के लिए एक खास प्लान बनाया गया है:

  • 60 दिनों का समय: शुरुआती समझौता साइन होने के बाद 60 दिनों तक बातचीत होगी. इसमें यूरेनियम संवर्धन और उसके स्टॉक को संभालने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.
  • 30 दिनों का समय: समझौते के 30 दिनों के भीतर समुद्री नाकेबंदी हटाने और व्यापारिक रास्तों को खोलने की प्रक्रिया पूरी होगी.

पैसों का लेन-देन और विवाद

इस डील में आर्थिक मदद और जमी हुई संपत्ति को लेकर भी चर्चा है, लेकिन इस पर दोनों पक्षों के बयानों में अंतर है.

विवरण जानकारी/राशि
जमी हुई संपत्ति की रिहाई 10 अरब डॉलर से 24 अरब डॉलर के बीच
पुनर्निर्माण सहायता लगभग 300 अरब डॉलर की योजना
नकद भुगतान अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि सिर्फ साइन करने पर नकद पैसा नहीं मिलेगा

नेताओं के बयान और आगे की तैयारी

इस समझौते को लेकर अलग-अलग देशों के नेताओं ने अपनी राय दी है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि शांति समझौते का अंतिम टेक्स्ट तैयार हो चुका है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुरुआत में इसे करीब बताया था, लेकिन बाद में ईरानी मीडिया द्वारा फैलाए गए कुछ दावों को गलत और फर्जी खबर बताया.

इस समझौते पर साइन करने के लिए स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर को चुना जा सकता है. संभावना है कि यह प्रक्रिया 14 जून को पूरी हो जाए, जो फ्रांस में होने वाले G7 शिखर सम्मेलन के ठीक पहले होगा.