अमेरिका और ईरान के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। राष्ट्रपति Donald Trump, उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। इस खबर के बाद दुनिया भर में हलचल मच गई है और अब सबकी नजरें जेनेवा में होने वाली औपचारिक बैठक पर हैं।
इस समझौते की शुरुआत रविवार, 15 जून 2026 को हुई। अब इसका औपचारिक साइनिंग प्रोग्राम शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में होगा। उपराष्ट्रपति Vance ने बताया कि यह एक छोटा और सामान्य दस्तावेज है, जो करीब डेढ़ पेज का है। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दों पर विस्तार से बात नहीं की गई है, उन पर आगे तकनीकी बातचीत होगी।
Strait of Hormuz और सैन्य स्थिति
राष्ट्रपति Trump ने एलान किया है कि Strait of Hormuz को खोल दिया जाएगा और यहाँ कोई टोल टैक्स नहीं लगेगा। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, यह सुविधा शुरू में 60 दिनों के लिए होगी, जिसके बाद लंबे समय के इंतजामों पर चर्चा होगी। उम्मीद है कि आने वाले कुछ हफ्तों में समुद्री जहाजों की आवाजाही पहले जैसी हो जाएगी। वहीं, अमेरिका ने साफ किया है कि वह फिलहाल मिडिल ईस्ट में अपनी सेना को कम नहीं करेगा।
पैसों और फंड को लेकर विवाद
समझौते में पैसों को लेकर दोनों तरफ से अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। ईरान की Revolutionary Guard का कहना है कि उन्हें उनके फ्रीज किए गए लगभग 24 अरब डॉलर में से आधे पैसे बातचीत पूरी होने से पहले मिल जाएंगे। दूसरी तरफ, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि जब तक ईरान शर्तों को नहीं मानता, तब तक कोई पैसा नहीं दिया जाएगा। साथ ही, ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की बात भी हुई है, जिसे गल्फ देशों के सहयोग से दिया जाएगा और यह ईरान के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां
- मध्यस्थता: इस डील को कराने में पाकिस्तान और कतर ने अहम भूमिका निभाई है।
- लेबनान मामला: इस समझौते में इसराइल द्वारा लेबनान से हटने की कोई बात नहीं कही गई है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने लेबनान पर हमलों को रोकने की मांग की है।
- ईरान का नजरिया: विदेश मंत्री Araghchi ने कहा कि यह सिर्फ बातचीत की शुरुआत है, अंत नहीं। उन्होंने पुराने अनुभवों और टूटे वादों का हवाला देते हुए सावधानी बरतने की बात कही है।