अमेरिका और ईरान के बीच जमी हुई संपत्तियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. एक तरफ ईरान का दावा है कि अमेरिका ने उसके पैसे छोड़ने पर सहमति जताई है, वहीं अमेरिकी अधिकारियों ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है. यह पूरा मामला इस्लामाबाद में चल रही सीधी बातचीत के बीच सामने आया है.

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अमेरिका और ईरान के दावों में क्या है अंतर?

11 अप्रैल 2026 को एक अमेरिकी अधिकारी ने साफ़ कहा कि अमेरिका ने ईरान की किसी भी जमी हुई संपत्ति को छोड़ने का समझौता नहीं किया है. दूसरी तरफ, ईरान के अधिकारियों ने दावा किया कि अमेरिका ने कतर और अन्य विदेशी बैंकों में जमा ईरान के पैसे छोड़ने पर सहमति दी है. ईरान के सूत्रों ने कहा कि इसमें कतर में रखे 6 अरब डॉलर भी शामिल हैं और इसे बातचीत में गंभीरता का संकेत माना जा रहा है.

इस्लामाबाद में क्या चल रही है बातचीत?

अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में सीधी बातचीत कर रहे हैं. इस मीटिंग का मुख्य मकसद छह हफ्ते से चल रहे युद्धविराम को स्थायी बनाना है. इस प्रक्रिया में कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:

  • ईरान ने मांग की कि अमेरिका दो हफ्ते के भीतर उसकी संपत्तियां छोड़ दे.
  • ईरान ने अमेरिका से इस दौरान अपनी सैन्य उपस्थिति न बढ़ाने को कहा.
  • बातचीत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और स्पेशल एनवॉय Steve Witkoff जैसे बड़े नाम शामिल हैं.
  • ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi मुख्य भूमिका में हैं.

कतर में रखे 6 अरब डॉलर का क्या मामला है?

यह पैसा सितंबर 2023 में एक कैदी अदला-बदली समझौते का हिस्सा था. उस समय दक्षिण कोरियाई बैंकों से यह पैसा कतर के खातों में भेजा गया था. अमेरिका ने तब कहा था कि इस पैसे का इस्तेमाल सिर्फ मानवीय मदद जैसे खाना और दवाइयों के लिए होगा. अक्टूबर 2023 में अमेरिकी विदेश मंत्री Antony Blinken ने पुष्टि की थी कि ईरान ने इस पैसे का इस्तेमाल नहीं किया है और अमेरिका का इस पर पूरा नियंत्रण है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.