अमेरिका और ईरान के बीच जमी हुई संपत्तियों को रिलीज करने को लेकर एक बड़ा समझौता हुआ है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि इस पैसे को रिलीज करने के लिए एक खास तरीका अपनाया जाएगा ताकि इसका इस्तेमाल आतंकवाद के लिए न हो सके। इस योजना के तहत ईरान इस पैसे से अमेरिका से खेती का सामान खरीदेगा जिससे अमेरिकी किसानों और ईरानी आम जनता दोनों को फायदा होगा।
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यह पूरी बातचीत स्विट्जरलैंड के Bürgenstock रिसॉर्ट में हुई जिसमें कतर और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। दोनों देशों के बीच जून के मध्य में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे जिसके बाद यह तकनीकी बातचीत आगे बढ़ी।
पैसे के इस्तेमाल और रिलीज का पूरा ब्योरा
उपराष्ट्रपति JD Vance ने इसे एक ‘क्लासिक ट्रंप डील’ बताया है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया पर अमेरिका और कतर दोनों की निगरानी रहेगी। वहीं ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने बताया कि कतर में जमा 6 अरब डॉलर रिलीज किए जाएंगे जिसका उपयोग भोजन और दवाई जैसी जरूरी चीजों को खरीदने के लिए होगा।
इसके अलावा ईरान को दुनिया के अलग-अलग देशों जैसे चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और तुर्की के बैंकों में जमा 100 अरब डॉलर से ज्यादा की संपत्ति तक पहुंच मिल गई है। अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरान को 21 अगस्त 2026 तक वैश्विक बाजारों में अपना तेल और गैस बेचने की मंजूरी भी दे दी है।
| विवरण | राशि/तारीख |
|---|---|
| कतर से रिलीज होने वाली राशि | 6 अरब डॉलर |
| अन्य देशों के बैंकों में जमा संपत्ति | 100 अरब डॉलर से ज्यादा |
| तेल और गैस बिक्री की समय सीमा | 21 अगस्त 2026 तक |
| प्रस्तावित पुनर्निर्माण फंड | 300 अरब डॉलर |
| समझौता ज्ञापन (MoU) की तारीख | 18 जून 2026 |
| अगली बातचीत का समय | 60 दिन बाद |
अन्य महत्वपूर्ण अपडेट
ईरानी विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने बताया कि इस समझौते से लेबनान युद्ध को खत्म करने और ईरान के पुनर्निर्माण में मदद मिलेगी। वॉशिंगटन और पाकिस्तान ने लेबनान में सैन्य अभियानों को रोकने के लिए एक ‘डीकंफ्लेक्शन सेल’ बनाने पर भी सहमति जताई है।
- परमाणु निरीक्षण: उपराष्ट्रपति Vance के मुताबिक ईरान अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को वापस आने की अनुमति देगा।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य: इस क्षेत्र में तनाव कम करना और रास्ता खोलना भी इस समझौते का अहम हिस्सा है।
- अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर हिजबुल्लाह ने इजराइल पर हमले जारी रखे तो वह ईरान पर कार्रवाई कर सकते हैं।
