अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के प्रतिनिधि इस्लामाबाद पहुँच चुके हैं. दोनों देशों के बीच साल 1979 के बाद यह पहली बड़ी मीटिंग है. पाकिस्तान की मदद से यह बातचीत शुरू हुई है ताकि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को पूरी तरह खत्म किया जा सके और शांति बहाल हो सके.

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इस मीटिंग में कौन-कौन शामिल है और क्या है मकसद?

अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance के साथ राष्ट्रपति ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर आए हैं. ईरान की ओर से संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ के नेतृत्व में 70 से ज्यादा लोगों की टीम पहुंची है, जिसमें सुरक्षा और आर्थिक एक्सपर्ट्स शामिल हैं. अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने यूरेनियम और मिसाइल प्रोग्राम को बंद करे और अमेरिकी कैदियों को रिहा करे.

ईरान की शर्तें और पाकिस्तान की भूमिका क्या है?

ईरान ने साफ कहा है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब लेबनान में युद्ध रुकेगा और उसके फंसे हुए पैसे वापस मिलेंगे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस मीटिंग को बहुत अहम बताया है. सुरक्षा के लिए पूरे इस्लामाबाद को लॉक डाउन कर दिया गया है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.

दोनों देशों की मुख्य मांगें

अमेरिका की मांगें ईरान की मांगें
यूरेनियम का स्टॉक खत्म करना लेबनान में युद्ध विराम
मिसाइल प्रोग्राम बंद करना फंसे हुए एसेट्स की वापसी
क्षेत्रीय सहयोग बंद करना हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर कंट्रोल
अमेरिकी कैदियों की रिहाई क्षेत्रीय बेस से अमेरिकी सेना की वापसी
यूरेनियम संवर्धन रोकना यूरेनियम संवर्धन के अधिकार की मान्यता
Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.