अमेरिका और ईरान ने अपने पुराने रिश्तों को सुधारने के लिए स्विट्जरलैंड के Bürgenstock रिसॉर्ट में एक बड़ी बैठक शुरू की है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस मुलाकात को ऐतिहासिक बताया है। हालांकि, इस बातचीत के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सख्त चेतावनी ने पूरे माहौल को तनावपूर्ण बना दिया है।
समझौते के तहत शुरू हुई बातचीत
यह मुलाकात 17 जून 2026 को दोनों देशों के बीच हुए एक इलेक्ट्रॉनिक समझौते (MoU) के बाद हुई है। इस समझौते के तहत 60 दिनों के लिए युद्ध रोकने (ceasefire) और तकनीकी चर्चाओं का रास्ता साफ किया गया था। इस बातचीत में मुख्य रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम के भंडार और लेबनान में हिंसा को खत्म करने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होनी थी। साथ ही, ईरान की अरबों डॉलर की जमा राशि को वापस करने की बात भी इस डील का हिस्सा थी।
कौन-कौन शामिल हुआ
- अमेरिका: उपराष्ट्रपति JD Vance के साथ ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हुए।
- ईरान: संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ बैंक और तेल मंत्रालय के बड़े अधिकारी आए।
- बिचौलिये: इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थता कर रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमन इसमें शामिल रहे।
ट्रंप की चेतावनी और ईरान का विरोध
बातचीत के दौरान ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि वह लेबनान में अपने प्रॉक्सी ग्रुप्स की मदद करना बंद करे। ट्रंप ने साफ कहा कि अगर परेशानी जारी रही तो वे फिर से हमले कर सकते हैं। इस बयान के बाद ईरान के प्रतिनिधि विरोध जताते हुए बैठक छोड़कर चले गए।
Strait of Hormuz बंद होने का खतरा
लेबनान में इजरायली हमलों के जवाब में ईरान ने Strait of Hormuz को फिर से बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस कदम से दुनिया भर के तेल व्यापार और अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ गई है। वहीं, परमाणु एजेंसी IAEA के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने भी इस मौके पर स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री से मुलाकात की और कूटनीति के जरिए मामला सुलझाने पर जोर दिया।
