Hormuz Strait Blockade: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव, ट्रंप ने दिया ‘शूट एंड किल’ का ऑर्डर, बंद हुआ दुनिया का सबसे बड़ा तेल रास्ता

अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Hormuz Strait) को लेकर लड़ाई अब बहुत गंभीर हो गई है। दोनों देशों ने एक-दूसरे के लिए रास्ता बंद कर दिया है, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल की सप्लाई पर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिका ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है, वहीं ईरान ने इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना शुरू कर दिया है।

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अमेरिका ने क्या सख्त कदम उठाए हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपनी सेना को आदेश दिया है कि जो भी ईरानी छोटी नावें स्ट्रेट में बारूदी सुरंगें (mines) बिछाएंगी, उन्हें देखते ही ‘शूट एंड किल’ कर दिया जाए। अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी Pete Hegseth ने बताया कि यह नाकाबंदी अब वैश्विक स्तर पर फैल चुकी है। अब तक 34 ईरानी जहाजों को बाहर निकलने से रोका गया है और दो जहाजों को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जब्त किया गया है। US Central Command के मुताबिक, 13 अप्रैल से अब तक 33 जहाजों को वापस लौटने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, अमेरिका ने USS George H.W. Bush स्ट्राइक ग्रुप को भी ईरान के पास तैनात कर दिया है।

ईरान का जवाब और उसकी तैयारी क्या है?

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और संसद स्पीकर Mohammad Bagher Qalibaf ने साफ कहा है कि उनके नेतृत्व में कोई फूट नहीं है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा नहीं खोला जाएगा। ईरान ने इसे दुनिया की अर्थव्यवस्था को बंधक बनाने जैसा बताया है। वहीं, ईरान के संसद सदस्य Abbas Papizadeh ने जानकारी दी है कि उन्होंने स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से टोल के रूप में पहला राजस्व वसूल कर लिया है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi इस मामले पर बातचीत के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद जा सकते हैं।

दुनिया और आम लोगों पर इसका क्या असर पड़ेगा?

इस लड़ाई की वजह से हज़ारों नाविक (seafarers) जहाजों पर ही फंस गए हैं। UN और International Maritime Organization ने अमेरिका की इस नाकाबंदी को अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यह तनाव जारी रहा, तो दुनिया भर में पेट्रोल और गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं। अमेरिका को स्ट्रेट से बारूदी सुरंगें हटाने में करीब 6 महीने का समय लग सकता है। दूसरी तरफ, ईरान के पास तेल जमा करने की क्षमता सीमित है और अगले एक महीने में उनके स्टोरेज फुल हो सकते हैं, जिससे उन्हें तेल उत्पादन कम करना पड़ सकता है।