अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने ‘Project Freedom’ नाम का एक नया प्लान शुरू किया है, जिसके तहत अमेरिकी सेना Hormuz Strait में जहाजों को रास्ता दिखाएगी। इस कदम के बाद ईरान के अधिकारियों ने सख्त चेतावनी दी है कि यह ceasefire का उल्लंघन होगा।

Project Freedom क्या है और अमेरिका इसे क्यों कर रहा है?

राष्ट्रपति Trump ने रविवार, 3 मई 2026 को घोषणा की कि सोमवार, 4 मई से अमेरिकी सेना Hormuz Strait में जहाजों को एस्कॉर्ट करना शुरू करेगी। उन्होंने इसे एक मानवीय कदम बताया है क्योंकि वहां कई कमर्शियल जहाजों में खाने-पीने और जरूरी सामान की कमी हो गई है। Trump ने यह भी साफ किया कि जो भी इस मानवीय प्रक्रिया में रुकावट डालेगा, उसे सख्ती से निपटाया जाएगा।

ईरान ने अमेरिका के इस कदम पर क्या कहा है?

ईरान के संसद सदस्य और राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख Ebrahim Azizi ने चेतावनी दी है कि Hormuz Strait में कोई भी अमेरिकी दखल ceasefire का उल्लंघन माना जाएगा। वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बताया कि ईरान फिलहाल अमेरिका के जवाब की जांच कर रहा है। यह जवाब पाकिस्तान के जरिए भेजा गया था, जो दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए 14 सूत्रीय योजना पेश की थी, लेकिन इसमें परमाणु बातचीत शामिल नहीं है।

Hormuz Strait में अभी क्या हालात हैं?

फरवरी 28, 2026 से इस इलाके में जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो चुकी है। 29 अप्रैल 2026 के आंकड़ों के मुताबिक करीब 900 से ज्यादा कमर्शियल जहाज खाड़ी में फंसे हुए थे। ईरान ने इस रास्ते पर अपनी पकड़ मजबूत कर रखी है, जबकि अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरानी बंदरगाहों पर पाबंदी लगा रखी है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian और मुख्य वार्ताकार Mohammad Bagher Ghalibaf ने कहा था कि बातचीत का स्वागत है, लेकिन नाकाबंदी और धमकी बातचीत में बड़ी बाधाएं हैं।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Project Freedom क्या है और यह कब शुरू होगा?

यह राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा शुरू किया गया एक प्लान है जिसके तहत अमेरिकी सेना 4 मई 2026 से Hormuz Strait में फंसे जहाजों को रास्ता दिखाएगी और उनकी मदद करेगी।

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ कौन है?

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और शांति प्रस्तावों को पहुंचाने के लिए पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।