अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 को ईरान के साथ हुए शुरुआती युद्धविराम को पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया है। अब अमेरिका चाहता है कि ईरान दुनिया के सामने यह वादा करे कि वह Strait of Hormuz में चलने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमला नहीं करेगा।

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वाशिंगटन ने औपचारिक तौर पर मांग की है कि ईरान सार्वजनिक रूप से जहाजों पर हमले रोकने और इस समुद्री रास्ते से बिना किसी रुकावट के आने-जाने की गारंटी दे। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान को यह साफ करना होगा कि इस रास्ते के सभी चैनल खुले रहेंगे और वहां कोई टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। साथ ही अमेरिका चाहता है कि ईरान अपनी पुरानी गलतियों को स्वीकार करे।

दूसरी तरफ ईरान का रुख काफी सख्त है। संयुक्त राष्ट्र में ईरान के राजदूत Amir Saeid Iravani ने 10 जुलाई को कहा कि Strait of Hormuz में किसी भी तरह की गतिविधि, चाहे वह रास्ता खोलना हो या बम हटाना, पूरी तरह से ईरान के अधिकार में है। उन्होंने यह भी कहा कि जहाजों को अब तेहरान को फीस देना शुरू करना चाहिए।

बता दें कि पिछले महीने राष्ट्रपति ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच एक समझौता हुआ था। इसका मकसद 60 दिनों के भीतर शांति बातचीत शुरू करना और जहाजों के लिए रास्ता मुफ्त रखना था। लेकिन इस हफ्ते यह समझौता टूट गया।

टकराव की वजह और असर

इस तनाव के बढ़ने की मुख्य वजह हाल ही में सऊदी अरब और कतर के तीन व्यापारिक टैंकरों पर हुए हमले थे। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर हमले किए और ईरान ने भी खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला किया।

  • 10 जुलाई 2026: राष्ट्रपति ट्रंप ने युद्धविराम खत्म करने का ऐलान किया।
  • 11 जुलाई 2026: ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने बातचीत की मांग से इनकार किया।
  • मौजूदा स्थिति: सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या कम हो गई है।

फिलहाल कतर और ओमान के राजनयिक इस संकट को सुलझाने और तनाव को कम करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सके।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.