अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए कतर की राजधानी Doha में बातचीत शुरू हो गई है। इस बातचीत में कतर और पाकिस्तान की मदद ली जा रही है। यह एक तकनीकी चर्चा है जिसका मकसद दोनों देशों के बीच शांति समझौता करवाना है ताकि इलाके में तनाव कम हो सके।

1 जुलाई 2026 को शुरू हुई इस बैठक में दोनों देशों के अधिकारी उन तकनीकी बातों पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे युद्ध को रोका जा सके। इससे पहले 17 जून को एक समझौते (MoU) पर साइन हुए थे, जिसमें 60 दिनों के लिए युद्ध रोकने (ceasefire) और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की बात कही गई थी।

बातचीत के मुख्य बिंदु

  • ईरान की मांग: ईरान चाहता है कि उसकी जमी हुई 12 अरब डॉलर की रकम में से 6 अरब डॉलर उसे वापस मिले।
  • परमाणु कार्यक्रम: परमाणु हथियारों के मुद्दे पर भी चर्चा होगी, हालांकि ईरान ने साफ किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
  • अमेरिकी भूमिका: अमेरिका के दूत Jared Kushner और Steve Witkoff ने बातचीत की तैयारी के लिए कतर के प्रधानमंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani से मुलाकात की थी।
  • नेतृत्व: ईरान की तरफ से डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi इस टीम का नेतृत्व कर रहे हैं।
  • प्रक्रिया: यह बातचीत पूरी तरह से ‘इनडायरेक्ट’ है और ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा।

यह पूरा विवाद 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ था। जून के आखिरी दिनों में यानी 28 और 29 तारीख को तनाव काफी बढ़ गया था और Strait of Hormuz में एक जहाज पर हमला भी हुआ था। अमेरिका के उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने बताया है कि समझौते के खास बिंदुओं पर बातचीत अभी जारी है।

वहीं, ओमान ने भी 29 जून को ईरान के साथ अलग से मुलाकात की थी ताकि Strait of Hormuz के भविष्य के मैनेजमेंट पर चर्चा की जा सके।