अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ है जिससे पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। इस डील के तहत ईरान के बंदरगाहों पर लगी पाबंदी हटेगी और समुद्री रास्तों से जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होगी। हालांकि, इस फैसले के बाद इसराइल और अमेरिका के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।
इसराइल ने जताई कड़ी नाराजगी
संयुक्त राष्ट्र में इसराइल के राजदूत Danny Danon ने इस समझौते की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह डील इसराइल, अमेरिका और खाड़ी देशों के लिए बहुत बुरी है। Danon के मुताबिक, राष्ट्रपति Trump ने जल्दबाजी में बातचीत खत्म करने की कोशिश की जिससे ईरान को अपनी स्थिति और मजबूत करने का मौका मिल गया।
ट्रंप की चेतावनी और डील की शर्तें
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने G7 समिट के दौरान साफ किया कि यह समझौता अभी अंतिम नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने शर्तों का पालन नहीं किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है और बमबारी शुरू कर देगा। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई है।
इस समझौते की कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
- इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में होंगे।
- अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से नाकाबंदी हटाएगा।
- ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही फिर शुरू करेगा।
- पुनर्निर्माण के लिए ईरान को कम से कम 300 अरब डॉलर मिलेंगे।
- परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम सहमति के बाद अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध हटाने पर काम होगा।
अन्य देशों और नेताओं की प्रतिक्रिया
इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कहा कि चाहे कोई भी समझौता हो, इसराइल ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने साफ किया कि गाजा, लेबनान और सीरिया जैसे सुरक्षा क्षेत्रों में इसराइल की सेना तैनात रहेगी।
वहीं, NATO के महासचिव Mark Rutte ने इस समझौते का स्वागत किया है। उनका मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने से दुनिया भर में व्यापार और ऊर्जा की सुरक्षा बढ़ेगी। इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।