अमेरिका और ईरान के बीच एक नए समझौते (MOU) के बाद इसराइल में काफी डर का माहौल है। इसराइल को लगता है कि इस डील से ईरान और ताकतवर हो जाएगा, जिससे उसकी सुरक्षा को बड़ा खतरा हो सकता है। अब अमेरिका के राजदूत Mike Huckabee और डोनाल्ड ट्रंप के करीबी साथी इसराइल की चिंताओं को दूर करने और भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं।

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यह समझौता एक अंतरिम समझौता है, जिसके तहत अंतिम शांति समझौते पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया है। इस डील में समुद्री नाकेबंदी खत्म करने, ईरानी तेल के निर्यात पर पाबंदियां हटाने और परमाणु हथियार न बनाने जैसी शर्तें शामिल हैं। साथ ही इसमें लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध को तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने की बात कही गई है।

इसराइल को सबसे ज्यादा डर इस बात का है कि इस समझौते की वजह से वह लेबनान में हिजबुल्लाह जैसे समूहों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई नहीं कर पाएगा। इस पर अमेरिका के राजदूत Mike Huckabee ने इसराइल को भरोसा दिलाया कि अमेरिका और इसराइल का रिश्ता एक अटूट बंधन है। उन्होंने साफ किया कि हिजबुल्लाह इस समझौते का हिस्सा नहीं है और इसराइल को अपनी रक्षा करने का पूरा हक है।

वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने इस समझौते की आलोचना करने वाले इसराइली अधिकारियों को सख्त लहजे में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप ही दुनिया में इसराइल के एकमात्र शक्तिशाली सहयोगी हैं और अधिकारियों को अब जमीनी हकीकत को समझने की जरूरत है।

दूसरी ओर, इसराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने ईरान के साथ शांति और लेबनान में युद्धविराम के ट्रंप के तरीके से अपनी असहमति जताई है। उनका मानना है कि यह समझौता ईरान को फायदा पहुंचा सकता है। उन्होंने साफ कहा कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने की अपनी कोशिशें जारी रखेंगे। वहीं ईरान के विदेश मंत्री Abbas Aragachi ने शर्त रखी है कि किसी भी अंतिम समझौते के लिए इसराइल को लेबनान से पूरी तरह हटना होगा।