अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। इसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) कहा जा रहा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि यह समझौता अब पूरा होने के बहुत करीब है, हालांकि जेनेवा में रविवार को होने वाली साइनिंग सेरेमनी की खबरों को ईरान के आधिकारिक सूत्रों ने गलत बताया है।
क्या है इस समझौते की मुख्य बातें?
ईरान की मेहर न्यूज़ एजेंसी ने इस ड्राफ्ट डील के 14 मुख्य बिंदुओं के बारे में जानकारी दी है। इस समझौते के तहत कुछ बड़ी बातें सामने आई हैं:
- अगले 30 दिनों के भीतर Strait of Hormuz में जहाजों का आवागमन फिर से शुरू होगा।
- अमेरिका ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाएगा।
- अमेरिका अपने सैनिकों को ईरान के आसपास के इलाकों से बाहर निकालेगा।
- ईरान ने भरोसा दिलाया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
- अमेरिका ईरान के फ्रीज किए गए पैसों को वापस करेगा।
वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और परमाणु सामग्री को नष्ट करने पर सहमत हुआ है।
ट्रंप का दावा और भारतीय जहाजों पर हमला
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने इशारा किया कि इस वीकेंड यूरोप में साइनिंग हो सकती है और इसमें उपराष्ट्रपति JD Vance शामिल होंगे। लेकिन इसी बीच ट्रंप ने ईरान पर एक गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार, 12 जून को ईरान ने Strait of Hormuz से बाहर जाने वाले भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला किया है, जिसे उन्होंने पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
जेनेवा मीटिंग और तैयारियों पर विवाद
सीएनएन और ब्लूमबर्ग जैसी बड़ी मीडिया एजेंसियों ने खबर दी थी कि रविवार, 14 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में इस समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि, ईरान की फाज न्यूज़ एजेंसी ने इन खबरों को पूरी तरह झूठ बताया है और कहा कि अभी ईरान की निर्णय लेने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। दूसरी तरफ, Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के चार C-17 ट्रांसपोर्ट विमान गुरुवार को ही यूरोप के लिए रवाना हो गए थे, जिनमें उपराष्ट्रपति JD Vance की संभावित यात्रा के लिए जरूरी सामान ले जाया गया है।
मध्यस्थता में देशों की भूमिका
इस पूरे मामले में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई है, इसीलिए इस समझौते का नाम ‘इस्लामाबाद एग्रीमेंट’ या ‘इस्लामाबाद डिक्लेरेशन’ रखे जाने की चर्चा है। इससे पहले कतर ने भी अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता कराने में मदद की थी।
