अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब खत्म हो सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को बताया कि दोनों देश एक समझौते के बहुत करीब हैं जिसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) कहा जा रहा है। इस डील का मकसद मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष को रोकना और शांति लाना है।
समझौते में क्या तय हुआ है
इस प्रस्तावित डील में कई महत्वपूर्ण शर्तें शामिल की गई हैं ताकि दोनों देशों के बीच तनाव कम हो सके। मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के कुछ हिस्सों को खत्म करेगा और परमाणु सामग्री को हटाएगा।
- बदले में अमेरिका ईरान पर लगे तेल निर्यात के प्रतिबंध हटाएगा और जमी हुई अरबों डॉलर की संपत्ति को वापस करेगा।
- दोनों देशों के बीच दुश्मनी खत्म होगी और एक 60 दिनों का युद्धविराम (ceasefire) बढ़ाया जाएगा ताकि परमाणु बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।
- ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ (Strait of Hormuz) पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा।
डोनाल्ड ट्रंप और इसराइल की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर विदेश मंत्री अराघची की बात का समर्थन किया। ट्रंप ने उन लोगों की आलोचना की जिन्होंने समझौते की शर्तें लीक कीं और कहा कि लीक की गई जानकारी का लिखित शर्तों से कोई लेना-देना नहीं है। वहीं, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस बात पर सहमति जताई कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है।
विवाद और अगली कार्रवाई
जहां एक तरफ बातचीत चल रही है, वहीं तनाव भी बना हुआ है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ में भारतीय जहाजों पर ड्रोन हमला करने का आरोप लगाया और इसे पूरी तरह गलत बताया। इस समझौते पर हस्ताक्षर के लिए यूरोप में एक कार्यक्रम हो सकता है, जिसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो सकते हैं। ईरान के विदेश मंत्री ने मीडिया से अपील की है कि जब तक आधिकारिक तौर पर साइन नहीं हो जाता, तब तक अटकलें न लगाएं।
