अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक नया समझौता हुआ है, जिसे ‘Islamabad Memorandum of Understanding’ (MOU) कहा जा रहा है। अमेरिकी सेना ने अब इस बात की तैयारी कर ली है कि वह इस समझौते के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी पूरी निगरानी करेगी। इस कदम से खाड़ी क्षेत्र में शांति बनाए रखने और राजनयिक नियमों को लागू करने की कोशिश की जा रही है।

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इस समझौते पर 15 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने घोषणा की थी कि यह डील तुरंत लागू होगी। इसके बाद 20 जून 2026 को Pentagon ने इस समझौते को जमीन पर उतारना शुरू किया, जिसमें समुद्र में लगाई गई नाकेबंदी को हटाना और जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू करना शामिल है।

समझौते की अहम तारीखें

तारीख क्या हुआ
15 जून 2026 Donald Trump और Masoud Pezeshkian ने MOU पर साइन किए
17 जून 2026 अमेरिका ने 14 पॉइंट वाले समझौते का पूरा टेक्स्ट जारी किया
19 जून 2026 Shehbaz Sharif ने डील लागू करने का ऐलान किया और CENTCOM ने जहाजों की रुकावट हटाई
20 जून 2026 Pentagon ने नाकेबंदी हटाने की प्रक्रिया शुरू की

समझौते में क्या तय हुआ है

इस 14 पॉइंट के दस्तावेज़ में कई बड़ी बातें तय की गई हैं ताकि दोनों देशों के बीच जंग का खतरा खत्म हो सके:

  • दोनों देश सैन्य ऑपरेशन तुरंत बंद करेंगे और एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध शुरू नहीं करेंगे।
  • Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा ताकि व्यापारिक जहाज आसानी से आ-जा सकें।
  • अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दी है।
  • ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
  • अमेरिका 30 दिनों के भीतर अपनी नौसेना की नाकेबंदी पूरी तरह खत्म कर देगा।
  • अंतिम समझौता होने के 30 दिनों बाद अमेरिका अपनी सेना को ईरान के करीब से हटा लेगा।

अधिकारियों ने क्या कहा

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि अमेरिका ईरान की हर गतिविधि पर कड़ी नज़र रखेगा। वहीं, राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने नियमों का पालन नहीं किया, तो वह दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान ने ठीक से व्यवहार नहीं किया, तो वह फिर से बम गिराने के लिए तैयार हैं। US Central Command (CENTCOM) ने बताया कि हालांकि उन्होंने जहाजों को रोकना बंद कर दिया है, लेकिन अमेरिकी युद्धपोत निगरानी के लिए इलाके में ही रहेंगे।

दूसरी तरफ, ईरान की सेना के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान अपनी रक्षा क्षमता बढ़ाएगा और किसी भी उल्लंघन का करारा जवाब देगा। ईरानी संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी ने अमेरिका पर भरोसा नहीं जताया है और कहा है कि वे खुद इस समझौते की निगरानी करेंगे। ईरान के विदेश मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि इस समझौते की मजबूती इस बात पर निर्भर करेगी कि दक्षिणी लेबनान में इसराइली सेना का रवैया कैसा रहता है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.