ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म हो सकता है. दोनों देशों के बीच एक बड़े समझौते पर सहमति बनी है जिसे ‘Islamabad Memorandum of Understanding’ या ‘Islamabad Declaration’ कहा जा रहा है. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को बताया कि यह डील अब फाइनल होने के बहुत करीब है और अगले कुछ दिनों में इस पर साइन हो सकते हैं.
समझौते में क्या खास बातें हैं
इस डील में सबसे पहले 60 दिनों के लिए युद्धविराम (ceasefire) को बढ़ाने की बात कही गई है. इसके साथ ही Strait of Hormuz को फिर से खोलने और ईरान के बंदरगाहों से अमेरिकी नाकेबंदी और प्रतिबंधों को हटाने पर सहमति बनी है. इस ड्राफ्ट के मुताबिक, लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई को तुरंत रोकने का फैसला लिया गया है.
परमाणु कार्यक्रम पर अलग-अलग राय
परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच अभी भी कुछ मतभेद दिख रहे हैं. अमेरिका के अधिकारियों का कहना है कि इस डील के तहत ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करना होगा और यूरेनियम को हटाना होगा. दूसरी तरफ, ईरान की सरकारी मीडिया का दावा है कि उन्हें यूरेनियम समृद्ध (enrich) करने का अधिकार मिलता रहेगा.
पैसों की वापसी और मध्यस्थता
इस डील को संभव बनाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और कतर ने अहम भूमिका निभाई है. समझौते में ईरान के फ्रीज किए गए पैसों को वापस करने और तेल प्रतिबंधों को हटाने का जिक्र है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान शर्तों को कितनी ईमानदारी से मानता है. इस ऐतिहासिक समझौते पर साइन करने के लिए स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर को सबसे संभावित जगह माना जा रहा है.
प्रमुख नेताओं की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक ‘शानदार समझौते’ की बात स्वीकार की है, हालांकि उन्होंने ईरानी मीडिया की कुछ खबरों को गलत बताया है. वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पुष्टि की है कि डील का फाइनल टेक्स्ट तैयार हो चुका है. इस बीच, इसराइल ने अमेरिका का साथ देते हुए कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी है.
