अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में चली लंबी शांति बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। US के उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने रविवार को यह जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया। अमेरिका का कहना है कि उसने पूरी ईमानदारी से बातचीत की, लेकिन ईरान की प्रतिबद्धताएं कम लगीं।

ℹ️: US-Iran Talks: इस्लामाबाद में बातचीत फेल, ईरान ने ठुकराए अमेरिका के नियम, बिना किसी डील के लौटा JD Vance

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत क्यों रही नाकाम?

उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने साफ किया कि वाशिंगटन को ईरान से परमाणु हथियार न बनाने की एक ठोस और verifiable गारंटी चाहिए। अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियारों के विकास को पूरी तरह छोड़ दे, जिसके सबूत दिए जा सकें। जब तक ईरान इस बात का पक्का भरोसा नहीं देता, तब तक कोई भी डील आगे नहीं बढ़ेगी। दोनों देशों के बीच तनाव कम करने पर कुछ सहमति बनी, लेकिन वेरिफिकेशन के तरीकों पर मतभेद बना रहा।

मीटिंग में कौन शामिल था और क्या थीं मुख्य मांगें?

इस महत्वपूर्ण बातचीत में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति J.D. Vance के साथ स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल थे। वहीं ईरान की तरफ से संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने नेतृत्व किया। पाकिस्तान ने इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दोनों delegations से अलग-अलग मुलाकात की।

विवरण जानकारी
अमेरिकी टीम J.D. Vance, Steve Witkoff, Jared Kushner
ईरानी टीम Mohammad Bagher Ghalibaf, Abbas Araghchi
मध्यस्थ देश पाकिस्तान (PM Shehbaz Sharif)
मुख्य विवाद परमाणु हथियार और वेरिफिकेशन सिस्टम
ईरान की मांग 6 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति की वापसी
क्षेत्रीय मुद्दा इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष
अंतिम नतीजा कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ

ईरान ने अपनी शर्तों में इसराइल द्वारा हिजबुल्लाह पर किए जा रहे हमलों को रोकने की मांग रखी थी। साथ ही ईरान अपनी 6 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति को वापस चाहता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चाहे समझौता हो या न हो, अमेरिका की जीत होगी।