अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में चली लंबी बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई है। दोनों देशों के बीच 21 घंटे से ज़्यादा समय तक चर्चा हुई, लेकिन कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया। अब दुनिया की नज़रें 22 अप्रैल को खत्म होने वाले सीजफायर पर हैं, जिसके टूटने का खतरा बढ़ गया है।

बातचीत नाकाम होने की मुख्य वजह क्या रही?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि ईरान ने अमेरिकी शर्तों को नहीं माना, खासकर परमाणु कार्यक्रम को लेकर। दूसरी तरफ ईरान के स्पीकर मोहम्मद बागर गालिबफ का कहना है कि अमेरिका ने भरोसा जीतने की कोशिश नहीं की। ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि अमेरिका की मांगें बहुत ज़्यादा थीं और दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी रही।

किन मुद्दों पर दोनों देशों में नहीं बनी बात?

दोनों देशों के बीच कई गंभीर मुद्दों पर मतभेद थे, जिसकी वजह से कोई नतीजा नहीं निकल पाया। मुख्य विवाद नीचे दी गई टेबल में देखे जा सकते हैं:

मुख्य विवादित मुद्दे विवरण
परमाणु कार्यक्रम यूरेनियम संवर्धन रोकना और सुविधाओं को खत्म करना
आतंकी फंडिंग हमास, हिजबुल्ला और हूतियों को मिलने वाली मदद बंद करना
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रास्ते को बिना टोल के खोलने और उसके नियंत्रण पर विवाद
प्रतिबंध और मुआवजा ईरान की मांग कि प्रतिबंध हटाए जाएं और युद्ध का मुआवजा मिले
लेबनान मामला ईरान की मांग कि इसराइल लेबनान में सैन्य कार्रवाई सीमित करे
क्षेत्रीय सुरक्षा अमेरिकी सहयोगियों के साथ मिलकर सुरक्षा ढांचा तैयार करना

पाकिस्तान अब क्या कदम उठा रहा है?

पाकिस्तान ने इस पूरी कोशिश को ‘इस्लामाबाद प्रोसेस’ का नाम दिया है ताकि बातचीत का सिलसिला जारी रहे। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की मध्यस्थता की दोनों देशों ने सराहना की। विदेश मंत्री इशाक डार ने तुर्की और सऊदी अरब के समकक्षों को इस स्थिति से अवगत कराया है और दोनों देशों को 22 अप्रैल से पहले फिर से बातचीत शुरू करने की सलाह दी है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.