अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई ऐतिहासिक शांति वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने लगभग 21 घंटे तक चर्चा की, लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके। उपराष्ट्रपति JD Vance रविवार को पाकिस्तान से रवाना हो गए और बताया कि वॉशिंगटन ने अपना सबसे अच्छा प्रस्ताव दिया था, जिसे ईरान ने स्वीकार नहीं किया। इस वजह से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका है।

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बातचीत क्यों नाकाम हुई और क्या था विवाद

अमेरिका की मुख्य शर्त यह थी कि ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ कहा कि परमाणु हथियार अमेरिका के लिए ‘रेड लाइन’ है। दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिका की मांगों को ‘अतार्किक’ और ‘अत्यधिक’ बताया। ईरान ने विशेष रूप से Strait of Hormuz और अपने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया।

ईरान और अमेरिका की मुख्य मांगें क्या थीं

दोनों देशों के बीच मुद्दों का टकराव काफी ज्यादा था। जहाँ अमेरिका परमाणु हथियारों पर रोक चाहता था, वहीं ईरान की अपनी अलग शर्तें थीं। नीचे दी गई टेबल में मुख्य बिंदुओं को देखा जा सकता है:

पक्ष मुख्य मांगें और शर्तें
अमेरिका (US) ईरान परमाणु हथियार न बनाने का लिखित वादा करे।
ईरान (Iran) जमे हुए 6 अरब डॉलर की संपत्ति वापस मिले।
ईरान (Iran) हेजबुल्लाह पर इजराइल के हमलों को रोका जाए।
ईरान (Iran) Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने का अधिकार।
ईरान (Iran) परमाणु कार्यक्रम के लिए गारंटी दी जाए।
अमेरिका (US) परमाणु सामग्री को हटाना और सख्त निगरानी।

पाकिस्तान की भूमिका और क्षेत्रीय हालात

इस बातचीत में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिकी और ईरानी दोनों प्रतिनिधिमंडलों से अलग-अलग मुलाकात की। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों पक्षों से युद्धविराम के समझौते का पालन करने की अपील की थी। इसी बीच, लेबनान में इजराइल और हेजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है, जिससे पूरे इलाके में अस्थिरता बनी हुई है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.