पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हो गई है। इस मामले में पाकिस्तान के विदेश मंत्री मोहम्मद इसहाक डार ने सऊदी अरब और मिस्र के साथ फोन पर बात की। उन्होंने दोनों देशों को बताया कि बातचीत का क्या नतीजा रहा और सभी पक्षों से सीज़फ़ायर का पालन करने की अपील की ताकि क्षेत्र में शांति बनी रहे।

बातचीत क्यों नहीं हो पाई और क्या था विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चर्चा चली, लेकिन कोई सहमति नहीं बन पाई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने बताया कि ईरान परमाणु हथियारों से जुड़ी अमेरिकी शर्तों को मानने को तैयार नहीं था। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका ने बहुत ज़्यादा मांगें रखी थीं, जिसकी वजह से यह बातचीत असफल रही।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और सीज़फ़ायर की स्थिति

पाकिस्तान इस पूरे विवाद को सुलझाने में बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है। विदेश मंत्री इसहाक डार ने अमेरिका और ईरान दोनों से आग्रह किया है कि वे 22 अप्रैल 2026 तक लागू सीज़फ़ायर का सख्ती से पालन करें। पाकिस्तान ने भरोसा दिलाया है कि वह भविष्य में भी शांति और कूटनीति के जरिए बातचीत कराने की कोशिश जारी रखेगा।

क्षेत्रीय प्रभाव और अन्य देशों का रुख

बातचीत का एक सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना था, जिसे ईरान ने बंद कर रखा था। सऊदी अरब और मिस्र ने पाकिस्तान की इस कोशिश का समर्थन किया है। इन देशों का मानना है कि व्यापार और तेल की सप्लाई के लिए समुद्री रास्तों का खुला रहना बहुत ज़रूरी है और तनाव को कम करना ही एकमात्र विकल्प है।

देश/संस्था मुख्य व्यक्ति/भूमिका
पाकिस्तान मोहम्मद इसहाक डार और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (मध्यस्थ)
अमेरिका जे.डी. वेंस और स्टीव विटकॉफ (प्रतिनिधिमंडल)
ईरान मोहम्मद बाक़र क़ालिबफ़ और अब्बास अराक़ची (प्रतिनिधिमंडल)
सऊदी अरब फ़ैसल बिन फ़रहन अल-सऊद (समर्थक)
मिस्र बद्र अब्देलत्टी (समर्थक)
तुर्की चतुर्भुज बैठक में शामिल (समर्थक)