अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनके वार्ताकार एक जरूरी मीटिंग के लिए कतर जा रहे हैं, लेकिन ईरान ने इस बात को पूरी तरह नकार दिया है। यह सब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में हुए हमलों के बाद हो रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच बनी शांति खतरे में पड़ गई है।
दोनों देशों के बीच 17 जून 2026 को ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (Islamabad MoU) पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते का मकसद युद्ध रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए फिर से खोलना था। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम फैसला लेने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया था। हालांकि, हाल ही में इस इलाके में हुए हमलों ने इस समझौते को कमजोर कर दिया है।
28 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने हमलों को रोकने पर सहमति जताई थी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि तकनीकी बातचीत जारी रहेगी और जहाज अब बिना किसी डर के आ-जा सकेंगे। इसी बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान ने मीटिंग की मांग की है और यह मुलाकात 30 जून को दोहा, कतर में होगी।
लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को गलत बताया है। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम घरिबाबादी ने साफ किया कि इस हफ्ते ऐसी कोई तकनीकी मीटिंग तय नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाए ने भी कहा कि कतर गई ईरानी टीम का अमेरिकी अधिकारियों से कोई लेना-देना नहीं है और अभी अंतिम समझौते की बातचीत शुरू नहीं हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के कंट्रोल को लेकर भी विवाद जारी है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि इस रास्ते पर सिर्फ ईरान का अधिकार है और जो जहाज ईरान के बताए रास्ते को नहीं मानेंगे, उससे तनाव बढ़ेगा।
समझौते के मुताबिक, ईरान जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा और अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाएगा। दोनों देशों ने बातचीत के लिए एक डायरेक्ट ‘हॉटलाइन’ बनाने पर भी सहमति जताई थी, लेकिन ईरान के अड़ियल रवैये के कारण यह अभी शुरू नहीं हो पाई है।
पैसों को लेकर भी दोनों देशों में मतभेद हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन का कहना था कि कतर ईरान की 6 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति जारी करेगा, जबकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अब तक कोई पैसा जारी नहीं किया गया है।
