अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में होने वाली एक अहम बैठक को टाल दिया गया है। यह मीटिंग शुक्रवार, 19 जून 2026 को होनी थी, जिसका मकसद पिछले चार महीने से चल रहे संघर्ष को खत्म करना था। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और कुछ तकनीकी वजहों से इस बातचीत को आगे बढ़ा दिया गया है।

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स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय (FDFA) ने कन्फर्म किया है कि अमेरिका, ईरान, कतर और पाकिस्तान के बीच होने वाली यह बातचीत अब नहीं होगी। हालांकि, स्विट्जरलैंड ने कहा है कि वह भविष्य में भी इन देशों के बीच बातचीत करवाने के लिए तैयार है और तैयारियां जारी हैं।

बैठक टलने की मुख्य वजहें

  • ईरान का पक्ष: ईरान के विदेश मंत्रालय ने बताया कि 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक डिजिटल समझौता (MoU) साइन हो चुका है। ईरान का कहना है कि डिजिटल साइन होने के बाद अब आमने-सामने मिलने की कोई जल्दबाजी नहीं है।
  • अमेरिका का पक्ष: व्हाइट हाउस ने जानकारी दी कि उपराष्ट्रपति JD Vance अब स्विट्जरलैंड नहीं जाएंगे। उन्होंने इसके पीछे लॉजिस्टिक दिक्कतों और तकनीकी बातचीत की योजना पूरी न होने की बात कही है।
  • लेबनान का तनाव: बैठक से ठीक पहले लेबनान में इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच लड़ाई तेज हो गई। इसराइल के हवाई हमलों और चार सैनिकों की मौत के बाद ईरान ने शर्त रखी है कि जब तक लेबनान में पूरी तरह ceasefire नहीं होगा, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ेगी।

ट्रंप का कड़ा रुख और नए अपडेट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर साफ कहा है कि 60 दिनों की बातचीत के दौरान ईरान को एक पैसा भी नहीं दिया जाएगा। यह बात उस समझौते (MoU) के उलट है, जिसमें ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड की बात कही गई थी।

दूसरी तरफ, एक बड़ी खबर यह भी आई है कि अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी हटाना शुरू कर दिया है। अब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए व्यापारिक जहाजों का आना-जाना फिर से शुरू हो सकेगा।